राम ने खाया मृग का मांस? सीता ने दी ‘मांस-मदिरा’ की प्रतिज्ञा? Dhruv Rathee पर FIR दर्ज, मचा बवाल
Dhruv Rathee: यूट्यूबर ध्रुव राठी एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। इस बार मामला उनके एक हालिया वीडियो से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने प्राचीन हिंदू ग्रंथों के आधार पर देवी-देवताओं के खान-पान पर चर्चा की।
वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर इसकी क्लिप वायरल हो गई और देखते ही देखते यह मामला बड़ा विवाद बन गया।
क्या कहा था ध्रुव राठी ने
Dhruv Rathee Ram Krishna Statement को लेकर ध्रुव राठी ने अपने वीडियो में सवाल उठाया कि भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण ने 14 साल के वनवास के दौरान क्या खाया होगा। उन्होंने पूछा कि क्या वे केवल फल और कंद-मूल पर निर्भर थे या उन्होंने शिकार भी किया होगा।
इस संदर्भ में उन्होंने वाल्मीकि रामायण का हवाला देते हुए दावा किया कि कुछ श्लोकों में मृग (हिरण) के मांस के सेवन का उल्लेख मिलता है। इसके साथ ही उन्होंने महाभारत और स्वामी विवेकानंद के लेखों का भी जिक्र किया।
विवाद क्यों बढ़ा
वीडियो वायरल होते ही कई लोगों ने ध्रुव राठी पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप लगाया। आलोचकों का कहना है कि उन्होंने संस्कृत शब्दों का गलत अर्थ निकाला और ग्रंथों की गलत व्याख्या की।
खास तौर पर ‘मांस’ और ‘सुरा’ जैसे शब्दों को लेकर विवाद और बढ़ गया। कुछ विद्वानों का मानना है कि इन शब्दों का अर्थ फल का गूदा या औषधीय पेय भी हो सकता है, न कि मांस और शराब।
FIR और शिकायत की मांग
Dhruv Rathee Controversy के बाद ध्रुव राठी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठने लगी। जानकारी के मुताबिक, एडवोकेट और सोशल मीडिया एक्टिविस्ट अनुभव गुप्ता (@anubhavgupta_ji)ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
उन्होंने न सिर्फ FIR की मांग की, बल्कि सरकार से ध्रुव राठी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को ब्लॉक करने की भी अपील की है।
https://x.com/anubhavgupta_ji/status/2035784982426472889?s=20
पुलिस की जांच और अगला कदम
Dhruv Rathee Controversy पर फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। सबसे पहले उस वीडियो की जांच की जाएगी, जिसमें दिए गए बयानों को आधार बनाकर शिकायत दर्ज की गई है।
अगर पुलिस को लगे कि यह मामला गंभीर है और जानबूझकर धार्मिक भावनाएं आहत की गई हैं, तो आगे कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
ध्रुव राठी का पक्ष क्या है
हालांकि इस विशेष मामले पर ध्रुव राठी का सीधा वीडियो बयान सामने नहीं आया है, लेकिन उनके समर्थकों का कहना है कि उन्होंने सिर्फ ग्रंथों के संदर्भ दिए हैं और उनका मकसद किसी की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था।
पहले भी ऐसे विवादों में ध्रुव यह कहते रहे हैं कि उनके वीडियो “शैक्षिक” उद्देश्य से बनाए जाते हैं।
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
इस मुद्दे पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ संगठनों ने इसे सनातन धर्म का अपमान बताया है और विरोध की चेतावनी दी है।
वहीं दूसरी ओर, कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं और कह रहे हैं कि ऐतिहासिक और धार्मिक विषयों पर चर्चा होनी चाहिए।
यूट्यूब की क्या भूमिका
अभी तक यूट्यूब ने इस वीडियो को अपने प्लेटफॉर्म से नहीं हटाया है। आमतौर पर यूट्यूब तभी कार्रवाई करता है जब सरकार की ओर से कोई निर्देश मिले या वीडियो उनकी गाइडलाइंस का उल्लंघन करता हो।
पहले भी हो चुका है विवाद
यह पहली बार नहीं है जब ध्रुव राठी किसी विवाद में आए हों। इससे पहले भी उनके एक वीडियो को लेकर शिकायत हुई थी, जिसके बाद उन्होंने वीडियो हटा दिया था और सफाई भी दी थी।
आखिरी बात
ध्रुव राठी का यह मामला अब सिर्फ एक वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह धार्मिक भावनाओं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के बीच संतुलन का सवाल बन गया है।
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