झारखंड छात्र आंदोलन: पूर्व JPSC अध्यक्ष गिरफ्तार, छात्रों पर किया लाठीचार्ज
Jharkhand student Protest: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। सोमवार को हजारों अभ्यर्थियों ने विधानसभा की ओर मार्च किया। प्रदर्शनकारियों ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने, CBI जांच और जपस्क-JSSC भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार की मांग उठाई। इसी बीच पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांगते की गिरफ्तारी ने मामले को और गंभीर बना दिया। छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज |
Jharkhand student Protest: झारखंड में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। कार्रवाई में कई छात्रों के घायल होने की खबर है, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। छात्र JPSC-JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया में ईमानदारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
Jharkhand student Protest: जारी प्रदर्शन अब विधानसभा तक पहुंचा।
झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह आंदोलन सिर्फ एक परीक्षा का मुद्दा नहीं रह गया है। पिछले कई दिनों से जारी प्रदर्शन अब विधानसभा तक पहुंच चुका है। सोमवार को आंदोलन के 17वें दिन बड़ी संख्या में छात्र तिरंगा और पोस्टर लेकर विधानसभा के लिए निकले। मार्च की शुरुआत सुबह करीब 10:30 बजे पुराने विधानसभा भवन से हुई। प्रदर्शनकारी JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने के साथ-साथ कथित परीक्षा गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच और CBI जांच की मांग कर रहे थे।
विधानसभा की ओर बढ़ते हुए प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी। छात्रों ने रास्ते में लगाए गए कई बैरिकेड्स को पार कर लिया। जब भीड़ विधानसभा के अंतिम बैरिकेड के करीब पहुंची, तो जगन्नाथपुर मंदिर के पास पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। आंदोलन को देखते हुए करीब 1,500 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था और लगभग चार किलोमीटर के मार्च रूट पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई।
झारखंड CID ने पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांगते गिरफ्तार।
इसी बीच मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया। झारखंड CID ने पूर्व JPSC अध्यक्ष एल. खियांगते को भर्ती परीक्षा अनियमितताओं से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया। उनकी गिरफ्तारी ऐसे समय हुई, जब हजारों छात्र विधानसभा की ओर मार्च कर रहे थे। आंदोलन में JLKM नेता देवेंद्र नाथ महतो भी शामिल हुए। वह पिछले नौ दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान उनका करीब 10.5 किलो वजन कम हुआ है। स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद वह एंबुलेंस से छात्रों के मार्च में पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील की।
वहीं, JLKM विधायक जयराम कुमार महतो ने छात्रों के आंदोलन को लेकर कहा कि यह मूल रूप से छात्रों की अपनी लड़ाई है। उनका कहना है कि छात्रों की मांगें पूरी हो जाने के बाद उन्हें आंदोलन जारी रखने की जरूरत नहीं होगी। दूसरी ओर, झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर छात्रों की मांगों को लेकर केवल आश्वासन देने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि कई छात्र लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं, कुछ भूख हड़ताल पर हैं और कुछ की तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने सरकार से छात्रों की मांगों पर ठोस कदम उठाने और CBI जांच की मांग का समर्थन किया।
राज्य सरकार का कहना, करीब 98 प्रतिशत मांगें स्वीकार
इस पूरे विवाद में सरकार और प्रदर्शनकारी छात्रों के दावों के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि उसने छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगें स्वीकार कर ली हैं। लेकिन प्रदर्शनकारी इस दावे से सहमत नहीं हैं। छात्रों का कहना है कि जिन 13 परीक्षाओं को रद्द करने की मांग की गई थी, उनमें से केवल तीन को रद्द करने पर सहमति बनी है।
यही अंतर अब आंदोलन की सबसे बड़ी वजहों में से एक बन गया है। उनका कहना है कि समस्या केवल कुछ परीक्षाओं को रद्द करने तक सीमित नहीं है। वे चाहते हैं कि JPSC और JSSC की भर्ती प्रक्रिया में ऐसी व्यवस्था बने, जिसमें परीक्षा से लेकर परिणाम तक हर चरण पारदर्शी हो और छात्रों का भरोसा बना रहे।
छात्रों की मांग, जांच निष्पक्ष तरीके से हो और दोषी पर कार्रवाई की जाए
JPSC से जुड़े अधिकारियों और परीक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। कथित अनियमितताओं की जांच के बीच पूर्व अध्यक्ष की गिरफ्तारी ने मामले को एक नया मोड़ दिया है। छात्रों की मांग है कि जांच निष्पक्ष तरीके से हो और दोषी पर कार्रवाई की जाए। हजारों युवाओं के लिए सरकारी नौकरी की परीक्षा सिर्फ एक परीक्षा नहीं होती। इसमें महीनों और कई बार वर्षों की तैयारी, पैसा, समय और उम्मीदें जुड़ी होती हैं। ऐसे में जब परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं, तो उसका असर सीधे छात्रों के भविष्य और व्यवस्था पर उनके भरोसे पर पड़ता है।
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