
Skin Care क्या आपको पता है कि अल्ट्रावायलेट रेस अर्थात पर पराबैंगनी विवीकरण त्वचा के लिए कितना ज्यादा हानिकारक है? अगर नहीं तो आपको बताते हैं कि यूवी रेज आपकी स्क्रीन के लिए कैंसर का कारण बन सकते हैं।
Skin Care: यूवी रेंज के प्रभाव
- Uva रेस: UVA रेस मैं करने की ऊर्जा अन्य ऊर्जा से कम पाई जाती है। यह उड़ जाए त्वचा की कोशिकाओं को बूढ़ा कर सकती हैं और इतना ही नहीं बल्कि कोशिकाओं के DNA को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इन करने के कारण आपकी स्किन में झुरिया आ सकती है और आप उम्र से पहले ही बूढ़े हो जाते हो। आपको बता दे कि इन करने से आपको स्किन कैंसर होने की संभावनाएं भी हैं।
- यूवीबी रेस: इन रेस मैं अन्य करने के मुकाबले ज्यादा ऊर्जा पाई जाती है। इन करने के कारण त्वचा की कोशिकाओं में DNA को सीधा नुकसान पहुंचता है। इतना ही नहीं बल्कि यह किरणें सनबर्न का कारण भी हो सकती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार इन करने से आपको कैंसर हो सकता है।
- Uvc रेस: अन्य प्रकार की ऊर्जा या करने के मुकाबले uvc रेस सबसे ज्यादा अधिक खतरनाक मानी जाती है। हालांकि जी करने अभी तक पृथ्वी तक नहीं पहुंची है इसका कारण यह है कि हमारे वायुमंडल में उच्च ओजोन लेयर स्थित है इसके कारण अल्ट्रावायलेट रेस हमारे पृथ्वी में नहीं आती। अगर यह पृथ्वी पर आए तो स्किन कैंसर का जोखिम 99% बढ़ सकता है।
Skin Care: हार्मफुल रेस से कैसे बचा जाए?
अगर हम सनस्क्रीन का उपयोग करें तो काफी हद तक हम हार्मफुल करने से बच सकते हैं। सनस्क्रीन यानी त्वचा की ऊपरी परत के तौर पर काम करने वाली एक क्रीम है जो हानिकारक किरणों से हमारी त्वचा को बचाती है। स्क्रीन के डॉक्टर यानी डर्मेटोलॉजिस्ट यह सलाह देते हैं कि हमको हर घंटे में सनस्क्रीन लगाना चाहिए खासकर की गर्मियों में। सनस्क्रीन में हमें SPF देख कर लगाना चाहिए।
Skin Care: आईए जानते हैं सनस्क्रीन लगाने के फायदे
- सनस्क्रीन के उपयोग से हमारे त्वचा में ट्रेनिंग का खतरा कम हो जाता है। आपने देखा होगा अक्सर लोग धूप में निकाल कर कल हो जाते हैं। अगर आप सनस्क्रीन का उपयोग करें तो आपके रंग में ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा।
- अगर आप नियमित रूप से सनस्क्रीन का उपयोग करते हैं तो आपको स्किन कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा नहीं रहेगा।
- गर्मियों में हमारी त्वचा खराब होने लगती है खासकर की संबंध से हमारी त्वचा कमजोर पड़ने लगती है। आपको बता दे सनबर्न
“ब्लैमिशस” झाइयों और झुरी का कारण बनती है। सनस्क्रीन के उपयोग से इनका खतरा कम रहता है। - आजकल के समय में ज्यादातर सनस्क्रीन में मॉइश्चराइजर का कॉन्बिनेशन होता है, इस कारण हमें अलग से मॉइश्चराइजर नहीं लेना पड़ता इसीलिए अच्छे ब्रांड का सनस्क्रीन ले।
- सूर्य की हार्मफुल करने से त्वचा की बनावट में असर पड़ने लगता है। त्वचा में खुरदुरी और सफेद निशान आने लगते हैं जिसकी वजह से स्क्रीन बेजान और रखी सी दिखने लगती है। अच्छी क्वालिटी की सनस्क्रीन उसे करने से हम इससे बच सकते हैं।
- त्वचा में गहरे दाग धब्बों के आने को हाइपर पिगमेंटेशन कहते हैं। यह तब होता है जब हम ज्यादा समय धूप में बिताते हैं। सनस्क्रीन का उपयोग करने से हम हाइपर पिगमेंटेशन से दूर रह सकते हैं।
- सनस्क्रीन लगाने के कई फायदे हैं जैसे की सनस्पॉट को रोका जा सकता है। इस करने की वजह से स्क्रीन की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है।
- मेलास्मा को रोकने के लिए सनस्क्रीन जरूरी है। मेलास्मा एक ऐसी स्थिति है जिस पर हमारे त्वचा में भरे और हल्के रंग के धब्बे आने लगते हैं।
Skin Care: अन्य महत्वपूर्ण बात
अगर आपको यह लगता है कि सनस्क्रीन का उपयोग करने से ही आप पूरी तरीके से सुरक्षित हो सकते हैं तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। सनस्क्रीन का उपयोग काफी हद तक आपको बचा सकता है लेकिन पूरी तरह नहीं।
मैं जून के महीने में धूप की किरणें अपने चरम पर होती है ऐसे में जितना हो सके बाहर निकलने से बच्चे और कम कपड़े पहनने से बचे।
यह भी पढ़े :- IDBI Bank Jobs 2024: आईडीबीआई बैंक में 1000 पदों पर भर्ती, जानें आवेदन प्रक्रिया, योग्यता और सैलरी