भारत की युवा ग्रैंडमास्टर Vaishali Rameshbabu ने शतरंज की दुनिया में बड़ा इतिहास रचते हुए FIDE विमेंस कैंडिडेट्स टूर्नामेंट 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया है।
भारत की युवा ग्रैंडमास्टर Vaishali Rameshbabu ने शतरंज की दुनिया में बड़ा इतिहास रचते हुए FIDE विमेंस कैंडिडेट्स टूर्नामेंट 2026 का खिताब अपने नाम कर लिया है। साइप्रस के कैप सेंट जॉर्ज होटल में खेले गए इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट के अंतिम राउंड में वैशाली ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रूस की अनुभवी खिलाड़ी कैटरिना लग्नो को हराया और अंक तालिका में शीर्ष स्थान हासिल किया।
इस जीत के साथ 24 वर्षीय वैशाली कैंडिडेट्स टूर्नामेंट जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं। अब वे विश्व शतरंज चैंपियनशिप में चीन की मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन जू वेनजुन को चुनौती देंगी।
फाइनल में शानदार रणनीति से दर्ज की जीत
निर्णायक मुकाबले में कैटरिना लग्नो ने सिसिलियन डिफेंस की ड्रैगन वेरिएशन से खेल की शुरुआत की, जो एक आक्रामक और जटिल ओपनिंग मानी जाती है। इसके जवाब में Vaishali Rameshbabu ने यूगोस्लाव अटैक अपनाते हुए शुरू से ही आक्रामक रुख दिखाया।
मुकाबले के शुरुआती चरण से ही वैशाली ने खेल पर पकड़ बना ली थी। लगभग 16वीं चाल तक वे स्पष्ट बढ़त में थीं। इसके बाद उन्होंने धैर्यपूर्वक खेलते हुए विरोधी की गलतियों का फायदा उठाया और अंततः 48वीं चाल पर लग्नो को हार मानने पर मजबूर कर दिया।
ड्रॉ मैच से बदली बाज़ी
फाइनल राउंड से पहले Vaishali Rameshbabu और कजाकिस्तान की बिबिसारा असौबायेवा अंक तालिका में बराबरी पर थीं। लेकिन आखिरी मुकाबले में भारतीय खिलाड़ी दिव्या देशमुख ने असौबायेवा को ड्रॉ पर रोक दिया, जिससे वैशाली को बढ़त मिल गई और उन्होंने खिताब अपने नाम कर लिया।
Vaishali Rameshbabu की दमदार वापसी
टूर्नामेंट की शुरुआत वैशाली के लिए आसान नहीं रही थी। शुरुआती चार मुकाबले ड्रॉ रहे और पांचवें राउंड में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार शानदार प्रदर्शन करते हुए वापसी की।
दिलचस्प बात यह है कि वैशाली इस टूर्नामेंट में सबसे कम रेटिंग वाली खिलाड़ियों में शामिल थीं, लेकिन उन्होंने अपने खेल से सभी को चौंका दिया।
चीन के दबदबे को चुनौती
पिछले एक दशक से महिला वर्ल्ड चैंपियनशिप में चीन का दबदबा रहा है। 2016 के बाद से लगातार चीनी खिलाड़ी ही खिताब जीतती आई हैं। ऐसे में वैशाली का फाइनल तक पहुंचना और अब खिताब जीतना इस दबदबे को चुनौती देने के रूप में देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैशाली के पास वर्ल्ड चैंपियन बनने की पूरी क्षमता है। उनकी तुलना भारत के युवा ग्रैंडमास्टर डी गुकेश से की जा रही है, जिन्होंने 2024 में चीन के डिंग लिरेन को हराकर इतिहास रचा था।
भारत के लिए गर्व का पल
भारत के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इससे पहले विश्वनाथन आनंद और डी गुकेश जैसे खिलाड़ियों ने कैंडिडेट्स टूर्नामेंट में सफलता हासिल की थी। अब वैशाली ने महिला वर्ग में यह कर दिखाया है।
उनकी इस जीत ने भारतीय शतरंज को एक नई दिशा दी है और आने वाले समय में महिला खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का काम करेगी।
क्या है कैंडिडेट्स टूर्नामेंट?
कैंडिडेट्स टूर्नामेंट शतरंज की दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण क्वालिफाइंग इवेंट माना जाता है। इसे वर्ल्ड चैंपियनशिप का सेमीफाइनल भी कहा जाता है। इस टूर्नामेंट का विजेता सीधे वर्ल्ड चैंपियन को चुनौती देने का हकदार बनता है।
इसमें दुनिया के शीर्ष 8 खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं और राउंड-रॉबिन फॉर्मेट में कुल 14 राउंड खेले जाते हैं। हर जीत पर 1 अंक और ड्रॉ पर 0.5 अंक मिलता है। अंत में सबसे अधिक अंक हासिल करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है।
अब नजर वर्ल्ड चैंपियनशिप पर
वैशाली रमेशबाबू की इस ऐतिहासिक जीत के बाद अब सभी की निगाहें वर्ल्ड चैंपियनशिप पर टिकी हैं, जहां उनका मुकाबला जू वेनजुन से होगा। अगर वे यह मुकाबला जीतती हैं, तो भारत को महिला शतरंज में एक नया वर्ल्ड चैंपियन मिल सकता है।
यह जीत न केवल वैशाली के करियर के लिए मील का पत्थर है, बल्कि भारतीय शतरंज के लिए भी एक नई शुरुआत का संकेत है।
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