इलाज के लिए उड़ान भरी... मौत ने बीच आसमान में घेरा! Ranchi Air Ambulance Crash में 7 की मौत
Ranchi Air Ambulance Crash: 23 फरवरी की शाम झारखंड के लिए बेहद दर्दनाक साबित हुई। रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एंबुलेंस चतरा जिले के सिमरिया के पास जंगल में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस हादसे में विमान में सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई। यह विमान एक गंभीर रूप से झुलसे मरीज को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जा रहा था। लेकिन दिल्ली पहुंचने से पहले ही यह उड़ान हमेशा के लिए थम गई।
क्यों आ रही थी एयर एंबुलेंस दिल्ली?
Jharkhand Plane Crash की यह घटना बेहद दर्दनाक बताई जा रही है। यह एयर एंबुलेंस 41 वर्षीय संजय कुमार को लेकर दिल्ली जा रही थी। वे आग की एक घटना में बुरी तरह झुलस गए थे और रांची के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। डॉक्टरों ने उनकी हालत गंभीर बताते हुए उन्हें दिल्ली के बड़े अस्पताल में रेफर किया था।
परिवार ने करीब 8 लाख रुपये जुटाकर एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की थी, ताकि समय रहते बेहतर इलाज मिल सके। लेकिन दुर्भाग्यवश रास्ते में ही हादसा हो गया और परिवार की उम्मीदें टूट गईं।
किस कंपनी का था विमान?
यह विमान दिल्ली की कंपनी Redbird Airways Private Limited द्वारा संचालित किया जा रहा था। विमान मॉडल था Beechcraft King Air C90, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर VT-AJV बताया गया। यह एक मेडिकल इवैक्युएशन (एयर एंबुलेंस) फ्लाइट थी।
कब और कैसे हुआ हादसा?
नागर विमानन महानिदेशालय यानी Directorate General of Civil Aviation (DGCA) के अनुसार, विमान ने शाम 7:11 बजे रांची से उड़ान भरी थी। उड़ान सामान्य थी और कोलकाता एटीसी से संपर्क भी हुआ। लेकिन शाम 7:34 बजे अचानक एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया।
रडार से विमान का सिग्नल गायब होते ही हड़कंप मच गया। बाद में पता चला कि चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र के करमाटांड़ गांव के पास घने जंगल में विमान क्रैश हो गया। स्थानीय लोगों ने तेज धमाके की आवाज सुनी और आसमान में धुएं का गुबार देखा। सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंचीं।
कौन-कौन थे सवार?
विमान में कुल सात लोग सवार थे। इनमें:
- कैप्टन विवेक विकास भगत
- कैप्टन सवराजदीप सिंह
- मरीज संजय कुमार
- डॉ. विकास कुमार गुप्ता
- सचिन कुमार मिश्रा (पैरामेडिक)
- अर्चना देवी (अटेंडेंट)
- धुरु कुमार (अटेंडेंट)
यानी एक मरीज, एक डॉक्टर, एक पैरामेडिक, दो अटेंडेंट, एक पायलट और एक को-पायलट। किसी को भी बचाया नहीं जा सका।
कहां टूटा संपर्क?
DGCA के अनुसार, विमान का संपर्क वाराणसी से लगभग 100 नॉटिकल मील दक्षिण-पूर्व दिशा में कोलकाता एटीसी के साथ टूट गया। इसके बाद बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। घना जंगल और दुर्गम इलाका होने के कारण राहत कार्य में काफी दिक्कत आई।
जांच कौन कर रहा है?
हादसे की जांच के लिए Aircraft Accident Investigation Bureau (AAIB) की टीम मौके पर पहुंच गई है। ब्लैक बॉक्स और तकनीकी डेटा की जांच की जा रही है। अभी तक हादसे के कारणों का आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है। तकनीकी खराबी, मौसम या किसी अन्य कारण की जांच की जा रही है।
सवाल जो परेशान कर रहे हैं
- क्या विमान में कोई तकनीकी खराबी थी?
- क्या मौसम की भूमिका रही?
- क्या संपर्क टूटने से पहले पायलट ने कोई इमरजेंसी कॉल की थी?
इन सभी सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएंगे।
परिवारों में मातम
इस हादसे ने सिर्फ सात लोगों की जान नहीं ली, बल्कि सात परिवारों की दुनिया उजाड़ दी। मरीज के परिजन जो उम्मीद के साथ दिल्ली भेज रहे थे, उन्हें अब सिर्फ खबर मिली—“विमान क्रैश हो गया।” पायलटों के परिवार भी सदमे में हैं।
रांची से दिल्ली तक शोक और सन्नाटा है। एक जिंदगी बचाने निकली उड़ान खुद हादसे का शिकार हो गई। अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर है, ताकि सच्चाई सामने आए और भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।
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