2 या 3 मार्च? चंद्रग्रहण और भद्रा के साए में उलझी तारीख, जानिए कब है Holika Dahan Muhurat
Holika Dahan Muhurat: होली का नाम सुनते ही मन में रंग, गुलाल, ढोल और मिठाइयों की खुशबू तैरने लगती है। लेकिन इस बार ब्रज सहित पूरे देश में एक सवाल ने लोगों को उलझन में डाल दिया है—आखिर होलिका दहन कब होगा? 2 मार्च या 3 मार्च? और रंगों की होली किस दिन खेली जाएगी?
इस बार फाल्गुन पूर्णिमा पर भद्रा और चंद्रग्रहण का विशेष संयोग बन रहा है। यही वजह है कि होली की तारीख को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। मथुरा और ब्रज के ज्योतिषाचार्यों ने पंचांग के आधार पर स्थिति साफ करने की कोशिश की है।
2 मार्च को होगा होलिका दहन
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 2 मार्च की शाम 5:56 बजे के बाद पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी। इसी समय से भद्रा भी प्रारंभ हो रही है, जो रात तक रहेगी। शास्त्रों में कहा गया है कि यदि भद्रा निशीथ काल (मध्यरात्रि) के बाद तक रहे तो प्रदोष काल में भद्रा का मुख छोड़कर होलिका दहन किया जा सकता है।
इस वर्ष भद्रा का मुख नहीं रहेगा, इसलिए सूर्यास्त के बाद प्रदोष बेला में होलिका दहन करना शास्त्रसम्मत माना गया है। मथुरा के ज्योतिषाचार्य कामेश्वर चतुर्वेदी के अनुसार 2 मार्च को शाम 7:30 बजे से रात 9 बजे तक का समय होलिका दहन के लिए शुभ रहेगा। सूर्यास्त 6:36 बजे के आसपास होगा, उसके बाद दहन किया जा सकता है।
3 मार्च को क्यों नहीं होगा दहन?
Chandra Grahan 2026 के तहत 3 मार्च को चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। ग्रहण का स्पर्श दोपहर 3:20 बजे से शुरू होकर शाम लगभग 6:45 बजे तक रहेगा। भारत में यह ग्रहण चंद्रोदय के साथ दिखाई देगा और करीब 20 से 30 मिनट तक इसका प्रभाव माना जा रहा है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। यानी 3 मार्च की सुबह से ही सूतक प्रभावी रहेगा। सूतक काल में किसी भी प्रकार का शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। इसी कारण 3 मार्च को न तो होलिका दहन किया जाएगा और न ही रंगों की होली खेली जाएगी।
इसके अतिरिक्त 3 मार्च की शाम 5:07 बजे से प्रतिपदा तिथि प्रारंभ हो जाएगी। शास्त्रों के अनुसार प्रतिपदा तिथि में होलिका दहन वर्जित माना गया है। इसलिए स्पष्ट है कि 3 मार्च को होलिका दहन संभव नहीं होगा।
रंगों की होली 4 मार्च को
चंद्रग्रहण और सूतक के कारण 3 मार्च को रंगोत्सव नहीं मनाया जाएगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार 4 मार्च को प्रतिपदा तिथि में रंगों की होली खेली जाएगी। यानी इस बार होलिका दहन और रंगों की होली के बीच एक दिन का अंतर रहेगा।
ब्रज में भी यही निर्णय लिया गया है। शरद साहित्य आचार्य और ब्रजेंद्र नागर के अनुसार ब्रजभूमि में ग्रहण का अधिकतम प्रभाव लगभग 24 मिनट रहेगा, लेकिन धार्मिक नियमों का पालन करते हुए 4 मार्च को ही रंग खेलना उचित होगा।
ग्रहण काल में क्या करें?
चंद्रग्रहण का समय साधना और मंत्र जाप के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। इस दौरान घर के मंदिर के पट बंद रखें। गर्भवती महिलाओं को बाहर न निकलने की सलाह दी जाती है। ग्रहण के बाद स्नान करें और सफेद वस्तुओं—जैसे चावल, दूध या कपड़े—का दान करना शुभ माना जाता है।
होली का असली संदेश
तारीख चाहे 2 हो या 4 मार्च, होली का असली अर्थ है प्रेम, भाईचारा और एकता। होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। वहीं रंगों की होली दिलों के बीच की दूरियां मिटाने का अवसर देती है।
इस बार भले ही खगोलीय संयोगों ने तारीख को लेकर भ्रम पैदा किया हो, लेकिन खुशियों का रंग फीका नहीं पड़ना चाहिए। 2 मार्च की शाम होलिका दहन करें और 4 मार्च को पूरे उत्साह के साथ रंगों का त्योहार मनाएं।
आखिर होली सिर्फ एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि दिलों को रंगने का नाम है। इस बार भी वही रंग बरसें—जो रिश्तों को और मजबूत कर दें।
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