Iran China Missile Deal Middle East Tension बढ़ा, Trump Strike Threat के बीच बड़ा कदम
Iran China Missile Deal से Middle East Tension बढ़ा। Anti-Ship Cruise Missile खरीद की तैयारी के बीच Donald Trump Strike Threat ने क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई। मध्य पूर्व में एक बार फिर Middle East Tension चरम पर है। रिपोर्ट्स के अनुसार Iran अब चीन से अत्याधुनिक Anti-Ship Cruise Missile खरीदने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर सामने आया है जब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है।
यह संभावित Iran China Missile Deal न केवल क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा पर भी बड़ा असर डाल सकता है।
Iran क्यों खरीद रहा है Anti-Ship Cruise Missile?
सूत्रों के अनुसार ईरान जिस मिसाइल सिस्टम पर विचार कर रहा है वह चीन की CM-302 श्रेणी की सुपरसोनिक Anti-Ship Cruise Missile है। यह मिसाइल लगभग 250–300 किलोमीटर तक मार कर सकती है और समुद्र की सतह के बेहद नजदीक उड़ान भरते हुए रडार से बचने में सक्षम मानी जाती है।
यदि यह सौदा पूरा होता है तो ईरान की नौसैनिक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। विशेष रूप से:
- अमेरिकी Aircraft Carrier समूहों के लिए खतरा बढ़ेगा
- Gulf क्षेत्र में समुद्री मार्गों पर ईरान की पकड़ मजबूत होगी
- Deterrence Strategy को मजबूती मिलेगी
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सीधे तौर पर अमेरिकी दबाव का जवाब है।
Donald Trump Strike Threat का असर
हाल के बयानों में Donald Trump ने कहा था कि यदि ईरान अपने Nuclear Program पर समझौता नहीं करता तो “strong action” लिया जा सकता है। इसी संदर्भ में अमेरिकी नौसेना की तैनाती भी बढ़ी है।
यह Strike Threat केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं मानी जा रही। अमेरिकी Destroyers और Carrier Strike Groups पहले से ही क्षेत्र में मौजूद हैं। ऐसे में ईरान अपनी समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना चाहता है ताकि किसी संभावित हमले की स्थिति में जवाबी क्षमता बनी रहे।
Persian Gulf और Strait of Hormuz क्यों महत्वपूर्ण?
Persian Gulf और Strait of Hormuz दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में गिने जाते हैं। दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% इसी जलडमरूमध्य से गुजरता है।
अगर ईरान के पास आधुनिक Anti-Ship Cruise Missile तैनात हो जाती है, तो:
- वैश्विक तेल कीमतों में अस्थिरता आ सकती है
- Shipping Insurance Rates बढ़ सकती हैं
- Gulf देशों की सुरक्षा रणनीति बदल सकती है
यानी यह केवल एक सैन्य सौदा नहीं बल्कि Global Economic Stability से भी जुड़ा मुद्दा है।
China की भूमिका क्या है?
China पिछले कुछ वर्षों में Middle East में अपनी रणनीतिक मौजूदगी बढ़ा रहा है। Energy Security, Belt and Road Initiative और Defense Export उसके प्रमुख हित हैं।
यदि China ईरान को CM-302 जैसी मिसाइल सप्लाई करता है, तो यह संकेत होगा कि Beijing अब खुलकर Tehran के साथ Strategic Military Cooperation बढ़ा रहा है। इससे US-China Geopolitical Rivalry भी और गहरी हो सकती है।
Regional Security पर संभावित प्रभाव
- Israel और Gulf Nations की चिंता बढ़ेगी
- US Navy की Patrol Strategy बदल सकती है
- Arms Race तेज हो सकती है
- Diplomatic Talks और मुश्किल हो सकते हैं
विश्लेषकों का कहना है कि यह Deal एक “Game Changer” साबित हो सकती है, खासकर अगर इसे Persian Gulf में तैनात किया जाता है।
Iran की Deterrence Strategy
ईरान लंबे समय से Asymmetric Warfare Strategy अपनाता रहा है। Drone Technology, Ballistic Missile Program और Naval Fast Attack Craft उसकी सैन्य रणनीति का हिस्सा रहे हैं।
अब यदि Anti-Ship Cruise Missile शामिल हो जाती है, तो यह उसकी Defensive Posture को Offensive Capability में बदल सकती है। इससे अमेरिका के लिए सीधी सैन्य कार्रवाई की लागत बढ़ जाएगी।
क्या यह Arms Embargo का उल्लंघन होगा?
कुछ अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह सौदा होता है तो यह UN Sanctions और Arms Control Norms के तहत विवाद खड़ा कर सकता है। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी किसी पक्ष ने इस Deal की पुष्टि नहीं की है।
आगे क्या?
Middle East Tension फिलहाल कम होने के संकेत नहीं दे रही। तीन संभावित परिदृश्य सामने हैं:
- Diplomatic Settlement
- Limited Military Escalation
- Full-Scale Regional Conflict
वैश्विक बाजार, खासकर Crude Oil Market, इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
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