Iran US Israel conflict: ईरान का बड़ा फैसला,भारत समेत मित्र देशों के लिए खुला होर्मुज स्ट्रेट
ईरान ने भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे ‘मित्र देशों’ के जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दे दी है।
Iran US Israel conflict: मध्य पूर्व में जारी अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव अब 27वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस बीच एक अहम कूटनीतिक और रणनीतिक अपडेट सामने आया है। ईरान ने भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे ‘मित्र देशों’ के जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दे दी है। यह जानकारी मुंबई स्थित ईरानी कॉन्सुलेट के हवाले से सामने आई है, जिसमें ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का बयान भी शामिल है।
कॉन्सुलेट के मुताबिक, ईरान ने साफ किया है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह बंद नहीं किया गया है, बल्कि यह केवल उन देशों के लिए प्रतिबंधित है जो ईरान के खिलाफ सक्रिय हैं। अन्य देशों को कुछ शर्तों के तहत इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति दी जा रही है।
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Toggleहोर्मुज स्ट्रेट क्यों है इतना अहम?
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। यह खाड़ी देशों को वैश्विक बाजार से जोड़ता है और दुनिया के लगभग 20% तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य या राजनीतिक तनाव सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है।
भारत जैसे ऊर्जा-निर्भर देश के लिए इसकी अहमियत और भी ज्यादा है। भारत अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 85% आयात करता है, जिसमें 55-60% हिस्सा खाड़ी देशों से आता है।
भारत को मिलेंगे बड़े फायदे
ईरान के इस फैसले से भारत को कई स्तरों पर राहत मिलने की उम्मीद है:
- तेल सप्लाई सुचारु: रोजाना करीब 50 लाख बैरल तेल की खपत वाले भारत के लिए सप्लाई चेन बिना बाधा जारी रहेगी।
- कीमतों पर नियंत्रण: युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थीं, लेकिन अब स्थिरता आ सकती है।
- कम होगा ट्रांसपोर्ट खर्च: तनाव के दौरान समुद्री बीमा 2-3 गुना तक बढ़ गया था, जो अब घट सकता है।
- तेज डिलीवरी: मिडिल ईस्ट से भारत आने वाले जहाज अब 5-10 दिनों में पहुंच सकेंगे।
- रुपये पर दबाव कम: तेल आयात महंगा होने से रुपये पर जो दबाव बनता है, उसमें भी राहत मिल सकती है।
F/A-18 जेट गिराने के दावे पर विवाद
इस बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी F/A-18 फाइटर जेट को मार गिराया, जो हिंद महासागर में क्रैश हो गया। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अनुसार यह कार्रवाई दक्षिणी तटीय क्षेत्र के पास की गई।
हालांकि, अमेरिका ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि ऐसा कोई घटना नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर भी संदेह जताया जा रहा है और इसे प्रोपेगेंडा बताया जा रहा है।
युद्ध रोकने के लिए अमेरिका का 15-पॉइंट प्लान
तनाव कम करने के प्रयासों के तहत अमेरिका ने ईरान को 15 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव भेजा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से तेहरान पहुंचाया गया है, जिसमें कई अहम शर्तें शामिल हैं।
प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
- ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर रोक लगाए और परमाणु हथियार न बनाने की गारंटी दे
- यूरेनियम संवर्धन सीमित करे और मौजूदा स्टॉक अंतरराष्ट्रीय एजेंसी को सौंपे
- बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल प्रोग्राम पर नियंत्रण
- होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलना और सुरक्षित बनाना
- अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को परमाणु ठिकानों तक बिना शर्त पहुंच देना
- हिजबुल्लाह जैसे संगठनों को समर्थन कम करना
- क्षेत्रीय तनाव कम करने के लिए सैन्य गतिविधियां सीमित करना
- एक निश्चित समय के लिए युद्धविराम लागू करना
इसके बदले अमेरिका ने ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने और सिविल न्यूक्लियर प्रोग्राम में सहयोग देने का प्रस्ताव दिया है।
क्या आगे बढ़ेगी बातचीत?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्ताव दोनों देशों के बीच संवाद की शुरुआत हो सकता है, लेकिन कई मुद्दों पर सहमति बनना आसान नहीं होगा। खासतौर पर मिसाइल प्रोग्राम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर दोनों पक्षों के रुख सख्त हैं।
फिलहाल, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर मिली आंशिक राहत ने वैश्विक बाजार और भारत जैसे देशों को थोड़ी राहत जरूर दी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस संघर्ष को खत्म कर पाते हैं या स्थिति और गंभीर होती है।






