लोकसभा में मंगलवार को उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया जब विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ No confidence motion कर दिया।
Om Birla no confidence motion: लोकसभा में मंगलवार को उस समय राजनीतिक माहौल गरमा गया जब विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ No confidence motion कर दिया। विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर सदन की कार्यवाही के संचालन में निष्पक्षता नहीं बरत रहे हैं और सरकार के पक्ष में झुकाव दिखा रहे हैं। प्रस्ताव को सदन में पेश करने के लिए 50 से अधिक सांसदों ने समर्थन दिया, जिसके बाद पीठासीन अधिकारी ने इसे स्वीकार करते हुए चर्चा की अनुमति दे दी। नियमों के अनुसार अब इस प्रस्ताव पर लगभग 10 घंटे तक विस्तृत चर्चा होगी, जिसके बाद आगे की संसदीय प्रक्रिया तय की जाएगी।
यह घटनाक्रम संसद के बजट सत्र के दौरान सामने आया है और इसे हाल के वर्षों में लोकसभा के भीतर सबसे बड़े राजनीतिक टकरावों में से एक माना जा रहा है। विपक्ष का कहना है कि स्पीकर का पद संविधान के तहत पूरी तरह निष्पक्ष होना चाहिए, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा दिखाई नहीं दे रहा।
गौरव गोगोई ने शुरू की बहस
No confidence motion पर चर्चा की शुरुआत कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने की। उन्होंने अपने संबोधन में आरोप लगाया कि बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को कई बार बोलने से रोका गया और उन्हें बार-बार नियम पुस्तिका दिखाकर टोक दिया गया।
गोगोई ने कहा कि संसद में सभी सांसदों को समान अवसर मिलना चाहिए, लेकिन हाल के सत्र में ऐसा नहीं दिखा। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब राहुल गांधी ने अपने भाषण में एक लेख का उल्लेख किया तो उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया गया, जबकि सत्ता पक्ष के कुछ सांसदों ने सदन में प्रतिबंधित किताबें तक दिखाईं और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
स्पीकर पर भेदभाव के तीन बड़े आरोप
गौरव गोगोई ने अपने भाषण में स्पीकर ओम बिरला पर तीन प्रमुख आरोप लगाए।
पहला आरोप:
2 फरवरी को जब राहुल गांधी सदन में बोल रहे थे, तब उन्हें बार-बार रोका गया और उनके तर्कों के समर्थन में सबूत देने को कहा गया।
दूसरा आरोप:
9 फरवरी को कांग्रेस नेता शशि थरूर जब सदन में बोल रहे थे, तब उनका माइक्रोफोन बंद कर दिया गया। गोगोई ने कहा कि अगर किसी सांसद को बोलने की अनुमति दी जाती है तो उसका माइक बंद करना उचित नहीं है।
तीसरा आरोप:
महिला सांसदों से जुड़ी एक टिप्पणी को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाए। गोगोई ने कहा कि स्पीकर की ओर से यह कहा गया था कि महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री की कुर्सी को घेर लिया था और उनके साथ कुछ भी हो सकता था। विपक्ष का कहना है कि इस तरह की टिप्पणी महिला सांसदों के सम्मान के खिलाफ है।
विपक्षी सांसदों का खुला समर्थन
जब No confidence motion सदन में पेश किया गया तो विपक्षी दलों के 50 से अधिक सांसद खड़े होकर उसके समर्थन में दिखाई दिए। इस दौरान सदन में कुछ देर तक शोर-शराबा भी हुआ। विपक्ष का कहना है कि संसद की गरिमा बनाए रखने के लिए स्पीकर का निष्पक्ष रहना बेहद जरूरी है।
सरकार का पलटवार
सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों का कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता है कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया जाता, जबकि वास्तविकता इससे अलग है।
रिजिजू ने कहा कि कई बार ऐसा हुआ है जब नेता प्रतिपक्ष अपनी बात कहकर सदन से चले जाते हैं और दूसरे सदस्यों की बात सुनने के लिए नहीं रुकते। उन्होंने यह भी कहा कि संसद में अनुशासन बनाए रखना सभी सांसदों की जिम्मेदारी है।
प्रियंका गांधी की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों में राहुल गांधी ऐसे नेता रहे हैं जो सरकार के सामने खुलकर अपनी बात रखते हैं। प्रियंका गांधी ने कहा कि राहुल गांधी सच बोलते हैं और शायद यही वजह है कि सत्ता पक्ष उनकी बातों से असहज महसूस करता है।
स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का इतिहास
भारतीय संसदीय इतिहास में लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना बेहद दुर्लभ माना जाता है। स्पीकर का पद संविधान के अनुसार निष्पक्ष और गरिमापूर्ण माना जाता है, इसलिए आमतौर पर राजनीतिक दल इस पद को लेकर टकराव से बचने की कोशिश करते हैं। हालांकि समय-समय पर स्पीकर के फैसलों को लेकर असहमति जरूर सामने आती रही है।
इससे जुड़े कुछ अहम तथ्य इस प्रकार हैं:
अब तक किसी भी लोकसभा स्पीकर को अविश्वास प्रस्ताव के जरिए पद से नहीं हटाया गया है।
अतीत में कुछ स्पीकरों के फैसलों को लेकर विपक्ष ने असंतोष जरूर जताया, लेकिन प्रस्ताव या तो आगे नहीं बढ़ पाए या बहुमत न मिलने के कारण गिर गए।
संसदीय नियमों के अनुसार स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव को सदन में पेश करने के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है।
इसके बाद सदन में विस्तृत चर्चा और फिर मतदान की प्रक्रिया होती है।
यही कारण है कि मौजूदा समय में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाया गया यह प्रस्ताव राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे क्या होगा?
अब लोकसभा में इस प्रस्ताव पर लंबी चर्चा होने की संभावना है। संसदीय नियमों के अनुसार सत्ता और विपक्ष दोनों पक्षों को अपनी-अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। इसके बाद सदन में मतदान की प्रक्रिया भी हो सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद केवल एक संसदीय प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो सकता है। फिलहाल पूरे देश की नजरें इस बहस पर टिकी हुई हैं कि संसद में आगे क्या फैसला निकलता है और यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।
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