petrol diesel excise duty cut: पेट्रोल-डीजल पर बड़ी राहत; एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती
पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये कर दिया गया है, जबकि डीजल पर यह ड्यूटी पूरी तरह समाप्त कर दी गई है।
petrol diesel excise duty cut: देशभर में बढ़ती महंगाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच केंद्र सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती करने का फैसला लिया है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी को 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये कर दिया गया है, जबकि डीजल पर यह ड्यूटी पूरी तरह समाप्त कर दी गई है।
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Toggleअंतरराष्ट्रीय संकट का असर
दरअसल, Israel–Iran conflict के चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला है। कुछ समय पहले तक 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहने वाला कच्चा तेल अब 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर पड़ता है।
अगर सरकार यह कदम नहीं उठाती, तो तेल कंपनियों को नुकसान की भरपाई के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी करनी पड़ती, जिससे आम जनता पर महंगाई का अतिरिक्त बोझ पड़ता। ऐसे में सरकार ने टैक्स में कटौती करके कीमतों को स्थिर बनाए रखने की कोशिश की है।
तेल कंपनियों को भारी घाटा
पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की कीमतों में 30% से 50% तक की वृद्धि हुई है। इसके बावजूद भारत में तेल कंपनियां लंबे समय से कीमतों को नियंत्रित रखे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 30 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है। एक्साइज ड्यूटी में कटौती से इस नुकसान को कम करने में मदद मिलेगी और कंपनियों पर दबाव भी घटेगा।
निजी कंपनियों ने बढ़ाए दाम
इस बीच, निजी क्षेत्र की कंपनी Nayara Energy ने हाल ही में पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। उदाहरण के तौर पर भोपाल में इस कंपनी का पेट्रोल 111.72 रुपये और डीजल 94.88 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया।
हालांकि, यह कीमतें राज्यों के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं क्योंकि वैट और अन्य स्थानीय टैक्स अलग-अलग राज्यों में भिन्न होते हैं।
प्रधानमंत्री की बैठक, हालात पर नजर
वर्तमान हालात को देखते हुए प्रधानमंत्री Narendra Modi आज 27 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करने वाले हैं। इस बैठक में वैश्विक संकट, ईंधन की स्थिति और देश की आर्थिक स्थिति पर चर्चा होने की संभावना है।
इससे पहले राज्यसभा में अपने बयान में प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी थी कि यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने इसे कोरोनाकाल जैसी चुनौती बताते हुए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर जोर दिया।
ईंधन की कमी की खबरों पर सरकार का जवाब
सरकार ने देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की संभावित कमी की खबरों को पूरी तरह खारिज किया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार भारत के पास लगभग 60 दिनों का पर्याप्त ईंधन भंडार मौजूद है, जिससे आपूर्ति में किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी।
क्या होती है एक्साइज ड्यूटी?
एक्साइज ड्यूटी एक प्रकार का अप्रत्यक्ष कर (इनडायरेक्ट टैक्स) है, जिसे केंद्र सरकार देश में उत्पादित वस्तुओं पर लगाती है। पेट्रोल और डीजल के मामले में यह टैक्स रिफाइनरी से निकलने के बाद प्रति लीटर के हिसाब से लगाया जाता है।
यह टैक्स फिक्स होता है, इसलिए सरकार इसे घटाकर आम जनता को राहत दे सकती है या बढ़ाकर राजस्व बढ़ा सकती है। मौजूदा फैसले से जहां सरकार के राजस्व में कमी आएगी, वहीं तेल कंपनियों और उपभोक्ताओं दोनों को राहत मिलेगी।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो सरकार को भविष्य में और भी कदम उठाने पड़ सकते हैं। फिलहाल यह निर्णय आम लोगों को राहत देने और बाजार को स्थिर रखने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।





