मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने राज्य में लागू दो-बच्चे की शर्त को हटाने का निर्णय लिया है।
Rajasthan two-child policy removed: राजस्थान की राजनीति से एक अहम और दूरगामी असर वाला फैसला सामने आया है। मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने राज्य में लागू दो-बच्चे की शर्त को हटाने का निर्णय लिया है। अब दो से ज्यादा बच्चे वाले नागरिक भी नगर निकाय और पंचायत चुनाव लड़ सकेंगे। इससे पहले राज्य में यह प्रावधान लागू था कि जिन व्यक्तियों के दो से अधिक संतान हैं, वे स्थानीय निकाय चुनावों में उम्मीदवार नहीं बन सकते थे।
सरकार के इस फैसले को स्थानीय लोकतंत्र के दायरे को विस्तृत करने वाला कदम माना जा रहा है, वहीं विपक्ष इसे वैचारिक बदलाव से जोड़कर देख रहा है।
कैबिनेट बैठक में मुहर, सत्र में आएगा विधेयक
बुधवार को हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। जानकारी के अनुसार, विधानसभा के मौजूदा सत्र में ही इस संशोधन से संबंधित विधेयक पेश किया जाएगा और इसे कानून का रूप दिया जाएगा।
राज्य के कानून मंत्री Jogaram Patel ने प्रेस वार्ता में बताया कि सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक नागरिकों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर देना है। उन्होंने कहा कि समय के साथ सामाजिक परिस्थितियां बदली हैं और अब लोगों में परिवार नियोजन को लेकर पर्याप्त जागरूकता है। ऐसे में केवल बच्चों की संख्या के आधार पर किसी को चुनाव लड़ने से वंचित रखना उचित नहीं माना गया।
‘समाज में जागरूकता बढ़ी है’ – राज्यवर्धन सिंह राठौड़
कैबिनेट मंत्री कर्नल Rajyavardhan Singh Rathore ने भी सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि आज के दौर में नागरिक पहले की तुलना में अधिक जागरूक और जिम्मेदार हैं। उनके अनुसार, आर्थिक रूप से सक्षम परिवार अपने बच्चों का बेहतर पालन-पोषण कर सकते हैं और उन्हें केवल संतान संख्या के आधार पर चुनावी राजनीति से दूर रखना लोकतांत्रिक भावना के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह निर्णय किसी विशेष विचारधारा या संगठन के प्रभाव में नहीं लिया गया है। राठौड़ ने कहा कि अगर सरकार किसी एजेंडे से प्रभावित होती तो तीन या उससे अधिक बच्चों की अलग शर्त तय की जाती, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उनका कहना है कि यह कदम व्यावहारिक सोच और बदलते सामाजिक परिवेश को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
पहले क्यों लागू की गई थी दो-बच्चे की शर्त?
राजस्थान सहित देश के कई राज्यों में 1990 के दशक और 2000 के शुरुआती वर्षों में जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो-बच्चे की शर्त लागू की गई थी। इस प्रावधान के तहत दो से अधिक संतान वाले व्यक्ति को पंचायत और नगर निकाय चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिया जाता था।
इस नीति के समर्थकों का मानना था कि इससे परिवार नियोजन को बढ़ावा मिलेगा और जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण लगेगा। हालांकि, समय-समय पर इस कानून को लेकर बहस होती रही। कुछ सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों का तर्क था कि यह प्रावधान व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन करता है और लोकतांत्रिक भागीदारी को सीमित करता है।
कांग्रेस का विरोध
विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार के इस फैसले की आलोचना की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार जनसंख्या नियंत्रण के मुद्दे पर अपने रुख से पीछे हट रही है और यह निर्णय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एजेंडे से प्रेरित है।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह परिवार नियोजन की नीति में बदलाव कर रही है। विपक्ष का कहना है कि ऐसे निर्णय से जनसंख्या संतुलन और सामाजिक संसाधनों पर दबाव जैसे मुद्दों पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है।
राजनीतिक और सामाजिक असर क्या होगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले का सीधा असर ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों की राजनीति पर पड़ेगा। अब वे लोग भी चुनावी मैदान में उतर सकेंगे जो पहले कानूनी अड़चन के कारण बाहर रह जाते थे। इससे संभावित उम्मीदवारों की संख्या बढ़ सकती है और चुनावी समीकरणों में बदलाव देखने को मिल सकता है।
साथ ही, यह निर्णय आने वाले पंचायत और नगर निकाय चुनावों को और अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकता है। विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इससे महिलाओं और पिछड़े वर्गों की राजनीतिक भागीदारी पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखने वाली बात होगी, क्योंकि कई मामलों में दो-बच्चे की शर्त का असर इन वर्गों पर अधिक देखा गया था।
हरियाणा में Shivaji Image Controversy, Washroom Sign पर लगी तस्वीरों से मचा बवाल!






