Ramadan Health Tips: रमज़ान में ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी! रोज़ा के दौरान ऐसे रखें अपनी सेहत सुरक्षित
Ramadan Health Tips: रमज़ान इस्लामी कैलेंडर का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। यही वह महीना है जब कुरान शरीफ नाज़िल हुआ था। दुनिया भर में करोड़ों मुसलमान इस महीने रोज़ा रखते हैं। फज्र की नमाज़ से लेकर मगरिब की नमाज़ तक यानी सूर्योदय से सूर्यास्त के बीच कुछ भी खाना-पीना नहीं होता। यह आत्मसंयम, इबादत और आत्मशुद्धि का समय है।
लेकिन लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने के दौरान सेहत का ख्याल रखना भी उतना ही जरूरी है। सही खान-पान और दिनचर्या अपनाकर आप पूरे महीने ऊर्जावान और स्वस्थ रह सकते हैं। आइए जानते हैं आसान और काम की बातें।
सहरी कभी न छोड़ें
सहरी यानी सूर्योदय से पहले का भोजन, पूरे दिन की ऊर्जा की नींव है। इसे हल्के में न लें। कोशिश करें कि सहरी में ऐसे भोजन शामिल हों जो धीरे-धीरे पचते हैं और लंबे समय तक ऊर्जा देते हैं।
- साबुत अनाज, ओट्स, दलिया या मल्टीग्रेन रोटी
- अंडा, दाल, छोले, पनीर या टोफू जैसे प्रोटीन
- मेवे और बीज
- दही या दूध
ये सभी शरीर को मजबूती देते हैं और दिनभर भूख कम लगने में मदद करते हैं। बहुत ज्यादा तला-भुना या नमकीन भोजन न लें, क्योंकि इससे प्यास ज्यादा लगती है।
पानी की कमी न होने दें
रोज़े के दौरान सबसे बड़ा खतरा डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी का होता है। इफ्तार से सहरी के बीच 2 से 3 लीटर तक पानी पीने की कोशिश करें। इफ्तार की शुरुआत खजूर और 1-2 गिलास पानी से करें। नारियल पानी, सूप, शोरबा और हर्बल ड्रिंक भी फायदेमंद होते हैं।
मीठे शरबत और सॉफ्ट ड्रिंक से बचें। इनमें शुगर ज्यादा होती है, जो थोड़ी देर ऊर्जा देती है लेकिन फिर अचानक थकान महसूस होने लगती है।
इफ्तार में संयम रखें
पूरा दिन भूखे रहने के बाद इफ्तार पर ज्यादा खाने का मन करना स्वाभाविक है। लेकिन एकदम भारी और तला-भुना खाना पेट पर दबाव डालता है। समोसे, पकोड़े और डीप फ्राइड चीजें कम मात्रा में लें। इसके बजाय फल, सलाद, खजूर, सूप और हल्का मुख्य भोजन लें।
अगर चाहें तो पहले हल्का नाश्ता करें, फिर नमाज़ पढ़ें और उसके बाद आराम से मुख्य भोजन लें। इससे पाचन बेहतर रहता है।
कैफीन और नमक कम करें
चाय, कॉफी और कोल्ड ड्रिंक में मौजूद कैफीन शरीर से पानी की कमी बढ़ा सकता है। रमज़ान से पहले ही धीरे-धीरे कैफीन कम करना शुरू कर दें, ताकि सिरदर्द जैसी समस्या न हो।
बहुत ज्यादा नमक वाले भोजन से भी प्यास ज्यादा लगती है। इसलिए नमकीन स्नैक्स और अचार सीमित मात्रा में लें।
हल्की एक्सरसाइज और दिनचर्या
रोज़ा रखने का मतलब यह नहीं कि पूरा दिन सुस्त रहें। हल्की वॉक या स्ट्रेचिंग जैसी एक्सरसाइज कर सकते हैं।
अगर आप सामान्य दिनों में जिम जाते हैं, तो रमज़ान में वर्कआउट की तीव्रता आधी कर दें। भारी कसरत से बचें, खासकर दिन में। इफ्तार के बाद हल्की एक्सरसाइज बेहतर विकल्प है।
नींद और आराम जरूरी
रमज़ान में सहरी के लिए जल्दी उठना पड़ता है, इसलिए नींद पूरी करना जरूरी है। कोशिश करें कि दिन और रात मिलाकर कम से कम 6-7 घंटे की नींद पूरी हो।पर्याप्त आराम से शरीर खुद को रिपेयर करता है और थकान कम होती है।
अगर कोई बीमारी हो तो क्या करें?
अगर आप मधुमेह, अस्थमा, हृदय रोग या किडनी की बीमारी से ग्रस्त हैं, तो रोज़ा रखने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें। कुछ दवाइयों को समय पर लेना जरूरी होता है और पानी की कमी से उनके असर में बदलाव आ सकता है।
सेहत सबसे बड़ी अमानत है, इसलिए सावधानी जरूरी है।
रमज़ान सिर्फ भूखा-प्यासा रहने का नाम नहीं, बल्कि आत्मसंयम और संतुलन का महीना है। अगर आप समझदारी से खान-पान और दिनचर्या अपनाते हैं, तो यह महीना न सिर्फ आध्यात्मिक बल्कि शारीरिक रूप से भी आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है।
इस रमज़ान, इबादत के साथ-साथ सेहत का भी पूरा ख्याल रखें और पूरे महीने ऊर्जा से भरपूर रहें।
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