
गुरुग्राम: ऑर्किड इंटरनेशनल स्कूल की लापरवाही से 3 छात्र 10वीं की इंग्लिश बोर्ड परीक्षा से वंचित
गुरुग्राम सेक्टर 41 स्थित ऑर्किड इंटरनेशनल स्कूल की लापरवाही के कारण तीन छात्र अपनी कक्षा 10वीं की इंग्लिश बोर्ड परीक्षा नहीं दे पाए। 10 फरवरी को हुए इस महत्वपूर्ण पेपर के दौरान इन छात्रों को एडमिट कार्ड न मिलने की वजह से परीक्षा केंद्र के बाहर ही रोक दिया गया।
परीक्षा छूटने से नाराज अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि स्कूल से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद एडमिट कार्ड नहीं दिए गए, जिसके कारण उनके बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
एडमिट कार्ड न मिलने की कहानी: अभिभावकों की आपबीती
छात्रों के अभिभावकों ने बताया कि उन्होंने स्कूल प्रशासन से एक सप्ताह से लगातार संपर्क बनाए रखा था। अभिभावकों के अनुसार, स्कूल ने पहले आश्वासन दिया था कि एडमिट कार्ड मिल जाएगा, लेकिन परीक्षा से एक दिन पहले शुक्रवार रात को उन्हें सूचित किया गया कि अब कुछ नहीं किया जा सकता।
एक अभिभावक ने कहा,
“हमने बार-बार स्कूल से संपर्क किया। हमें भरोसा दिलाया गया था कि एडमिट कार्ड समय पर मिल जाएगा। लेकिन परीक्षा के दिन भी हमारे बच्चों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश नहीं मिला। यह हमारे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।”
3 students left in lurch on class 10 English board exam as #Gurgaon school fails to ‘deliver’ admit cards
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— The Times Of India (@timesofindia) February 15, 2025
CBSE से संबद्धता को लेकर उठे सवाल
अभिभावकों का कहना है कि जब उन्होंने 2023 में ऑर्किड इंटरनेशनल स्कूल, गुरुग्राम में अपने बच्चों का दाखिला करवाया था, तब स्कूल ने दावा किया था कि CBSE से संबद्धता (affiliation) दो महीने के भीतर मिल जाएगी।
हालांकि, अब यह स्पष्ट हो गया है कि गुरुग्राम की इस शाखा को अभी तक CBSE की मान्यता नहीं मिली है। इस खुलासे से अभिभावकों में आक्रोश है, क्योंकि स्कूल के बाहर लगा CBSE से संबद्धता का बोर्ड छात्रों और उनके परिवारों को भ्रमित करता रहा।
CBSE से संबद्धता पर स्कूल का स्पष्टीकरण
जब इस विवाद पर स्कूल की प्रिंसिपल से सवाल किया गया तो उन्होंने अभिभावकों के आरोपों को खारिज कर दिया। उनका दावा है कि गुरुग्राम शाखा को पिछले साल ही CBSE से संबद्धता मिल चुकी है।
प्रिंसिपल ने कहा,
“हमने CBSE से संपर्क किया था, लेकिन कुछ दस्तावेजी समस्याओं के कारण एडमिट कार्ड जारी नहीं हो सके। हम जल्द ही हाई कोर्ट में याचिका दायर कर छात्रों के लिए पुनः परीक्षा की मांग करेंगे।”
असली वजह: द्वारका शाखा से जुड़ी गलतफहमी
इस पूरे मामले में भ्रम तब और बढ़ गया जब यह सामने आया कि गुरुग्राम शाखा के बजाय द्वारका सेक्टर-19 की शाखा को CBSE से मान्यता प्राप्त है।
अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल प्रशासन ने जानबूझकर गुरुग्राम शाखा की CBSE मान्यता के मुद्दे पर गलत जानकारी दी।
एक अभिभावक ने कहा,
“अगर स्कूल को पहले से पता था कि उनकी शाखा को CBSE से मान्यता नहीं मिली है, तो उन्होंने हमारे बच्चों का भविष्य क्यों दांव पर लगाया?”
स्कूल प्रशासन की लापरवाही से भविष्य संकट में
अभिभावकों का कहना है कि स्कूल की लापरवाही के कारण उनके बच्चों का एक महत्वपूर्ण विषय छूट गया है। अब उनका पूरा शैक्षणिक भविष्य अधर में लटक गया है।
क्या कहता है CBSE नियम?
CBSE के नियमों के अनुसार, केवल उन्हीं स्कूलों के छात्रों को बोर्ड परीक्षा में बैठने की अनुमति होती है, जो बोर्ड से मान्यता प्राप्त होते हैं। किसी भी तरह की दस्तावेजी गड़बड़ी के कारण छात्रों को परीक्षा से वंचित किया जा सकता है।
स्कूल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी
अभिभावकों ने कहा है कि अगर जल्द ही इस मामले में समाधान नहीं निकला तो वे स्कूल प्रशासन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।
एक अभिभावक ने कहा,
“हम अपने बच्चों के भविष्य के साथ समझौता नहीं करेंगे। स्कूल की लापरवाही के कारण हमारे बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।”
क्या होगा आगे?
- हाई कोर्ट में याचिका: स्कूल प्रशासन ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने की बात कही है ताकि इन छात्रों के लिए पुनः परीक्षा आयोजित कराई जा सके।
- CBSE से संपर्क: अभिभावक भी CBSE अधिकारियों से संपर्क साध रहे हैं ताकि बच्चों के भविष्य की रक्षा की जा सके।
- कानूनी कार्रवाई: यदि स्कूल जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं करता, तो अभिभावक कानूनी कदम उठाने की तैयारी में हैं।
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