करीब 40 दिनों से जारी तनाव के बाद Iran और United States के बीच दो हफ्तों के युद्धविराम (सीजफायर) पर सहमति बन गई।
Iran-US Ceasefire: करीब 40 दिनों से जारी तनाव के बाद Iran और United States के बीच दो हफ्तों के युद्धविराम (सीजफायर) पर सहमति बन गई। इस समझौते ने पूरे पश्चिम एशिया में राहत की उम्मीद जगाई है।
इस सीजफायर की घोषणा से कुछ घंटे पहले तक माहौल बेहद तनावपूर्ण बना हुआ था। लेकिन अचानक आई इस खबर ने वैश्विक कूटनीति में एक नया मोड़ ला दिया।
पर्दे के पीछे पाकिस्तान की मध्यस्थता
Iran-US Ceasefire में Pakistan की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान पिछले कुछ हफ्तों से दोनों देशों के बीच बैक-चैनल डिप्लोमेसी के जरिए संवाद बनाए हुए था। एक वरिष्ठ पाकिस्तानी सूत्र ने बताया कि बातचीत “तेजी से आगे बढ़ रही थी” और माहौल “गंभीर लेकिन शांत” था। हालांकि, इस बातचीत में शामिल लोगों का दायरा बेहद सीमित रखा गया था।
पाकिस्तान दोनों देशों के बीच संदेश पहुंचाने का काम कर रहा था, जिससे संवाद की कड़ी बनी रही।
ऐतिहासिक रिश्तों का मिला फायदा
पाकिस्तान के ईरान के साथ लंबे समय से करीबी संबंध रहे हैं। दोनों देशों की साझा सीमा और सांस्कृतिक जुड़ाव भी रिश्तों को मजबूत बनाता है। वहीं अमेरिका के साथ भी पाकिस्तान के संबंध हाल के वर्षों में रणनीतिक रूप से अहम बने हुए हैं।
Donald Trump ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को अपना “पसंदीदा” बताया था और उनकी समझ की तारीफ की थी।
इन संतुलित रिश्तों ने पाकिस्तान को मध्यस्थ की भूमिका निभाने में मदद दी।
बीच में बढ़ा तनाव, नाराज़ भी हुआ पाकिस्तान
हालांकि यह समझौता आसान नहीं था। बातचीत के दौरान कई बार हालात बिगड़ते भी नजर आए। सोमवार को Israel ने ईरान पर हमला किया, जिसके जवाब में ईरान ने Saudi Arabia को निशाना बनाया। इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया। पाकिस्तान के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने संसद में कहा कि “हालात सकारात्मक दिशा में बढ़ रहे थे, लेकिन अचानक घटनाओं ने स्थिति को जटिल बना दिया।” पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने भी सऊदी अरब पर हमले को शांति प्रयासों के लिए नुकसानदायक बताया।
आधी रात के बाद बना समझौता
तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास लगातार जारी रहे। Shehbaz Sharif ने आधी रात के बाद बयान जारी कर कहा कि बातचीत “मजबूती और प्रभावी तरीके से आगे बढ़ रही है।” उन्होंने अमेरिका से दो हफ्तों का समय देने और ईरान से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने की अपील की। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रज़ा अमीरी मोगद्दम ने भी संकेत दिए कि बातचीत “संवेदनशील चरण से आगे बढ़ चुकी है।” आखिरकार सुबह करीब 5 बजे युद्धविराम पर सहमति बन गई और दोनों देशों को आगे की बातचीत के लिए इस्लामाबाद आने का न्योता दिया गया।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना बड़ा मुद्दा
इस पूरे विवाद में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अहम केंद्र बना रहा। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल सप्लाई का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अगर यह मार्ग बंद होता, तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतों और सप्लाई पर गंभीर असर पड़ सकता था। यही वजह थी कि अंतरराष्ट्रीय दबाव भी लगातार बना हुआ था।
भरोसे की कमी अभी भी बड़ी चुनौती
हालांकि सीजफायर हो चुका है, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं कही जा सकती। सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है और उनके रुख अब भी काफी सख्त हैं। एक पाकिस्तानी अधिकारी ने कहा कि “स्थिति अभी भी नाजुक है और हमें बेहद सतर्क रहना होगा।”
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