खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच कराई गई जांच में चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं।
Ghaziabad food adulteration: जिले में खाद्य पदार्थों में मिलावट का गंभीर मामला सामने आया है। खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच कराई गई जांच में चौंकाने वाले तथ्य उजागर हुए हैं। जांच में पाया गया कि लगभग हर दूसरा नमूना गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरा। त्योहारों के सीजन, खासकर होली से पहले मिलावटी और घटिया खाद्य सामग्री की आपूर्ति बढ़ने से प्रशासन ने सतर्कता और सख्ती दोनों बढ़ा दी है।
48 प्रतिशत नमूने फेल
खाद्य सुरक्षा विभाग ने एक अप्रैल 2025 से एक फरवरी 2026 के बीच जिले के 3,660 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान 904 स्थानों पर छापेमारी की गई और जांच के लिए 1,332 खाद्य पदार्थों के नमूने एकत्र किए गए। अब तक 1,066 नमूनों की रिपोर्ट प्राप्त हुई है, जिनमें से 394 नमूने अधोमानक (सब-स्टैंडर्ड) और 102 नमूने स्वास्थ्य के लिए असुरक्षित पाए गए।
कुल मिलाकर 511 नमूने मानक के अनुरूप नहीं मिले, जो कि 47.94 प्रतिशत हैं। यानी लगभग हर दूसरा खाद्य नमूना जांच में फेल हुआ। यह आंकड़ा उपभोक्ताओं की सेहत के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मिलावटी खाद्य पदार्थों के सेवन से फूड पॉइजनिंग, पेट और लीवर संबंधी बीमारियां, एलर्जी, यहां तक कि दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं। खासकर बच्चों और बुजुर्गों पर इसका प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है।
Ghaziabad food adulteration
जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रशासन ने कानूनी कार्रवाई भी तेज की है। एडीएम सिटी की कोर्ट में चालू वित्तीय वर्ष के दौरान अप्रैल से जनवरी तक 387 मामले दर्ज कराए गए। इनमें से 319 मामलों में कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए दोषियों पर कुल दो करोड़ रुपये का अर्थदंड लगाया है।
इसके अलावा न्यायिक न्यायालय में 112 मामले दर्ज हुए, जिनमें एक मामले में 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। अधिकारियों का कहना है कि मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी और किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
दुग्ध उत्पादों में सबसे ज्यादा गड़बड़ी
जांच में यह भी सामने आया कि दूध से बनने वाले उत्पाद—जैसे पनीर, घी और खोया—में सबसे अधिक मिलावट पाई गई। कई मामलों में मिल्क पाउडर और रिफाइंड ऑयल मिलाकर पनीर तैयार किया गया, जिसे त्योहारी सीजन में बाजार में उतारा जाता है।
मिठाइयों में मानक से अधिक कृत्रिम रंगों का उपयोग पाया गया। कुछ मामलों में घटिया और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रंगों का इस्तेमाल भी सामने आया। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे रंगों से त्वचा और आंतों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
होली से पहले बड़ी कार्रवाई
होली के मद्देनजर फरवरी माह में विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान बाहरी जिलों से लाई गई बड़ी मात्रा में संदिग्ध खाद्य सामग्री जब्त कर नष्ट कराई गई।
- राजस्थान और अलीगढ़ से लाया गया 840 किलो पनीर विजयनगर में नष्ट कराया गया।
- मेरठ से राजनगर एक्सटेंशन में बिक्री के लिए लाया गया 430 किलो पनीर नष्ट किया गया।
- बागपत से ट्रोनिका सिटी पहुंचा 200 किलो खोया जब्त कर नष्ट कराया गया।
- अलीगढ़ से लाया गया 1,200 किलो पनीर हिंडन पुलिस चौकी के पास पकड़ा गया और मौके पर नष्ट किया गया।
- लोनी क्षेत्र में खराब गुणवत्ता का 454 किलो सरसों का तेल जब्त किया गया।
अधिकारियों के अनुसार, मिलावटी खाद्य पदार्थों की सप्लाई रोकने के लिए जिले में पांच विशेष टीमें गठित की गई हैं। ये टीमें गोदामों और दुकानों की नियमित जांच के साथ बाहरी जिलों से आने वाली खाद्य सामग्री पर विशेष निगरानी रख रही हैं।
खरीदारी के समय बरतें सावधानी
खाद्य सुरक्षा विभाग के मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी आशुतोष राय ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि त्योहारों के दौरान खरीदारी करते समय सतर्क रहें। खुले में बिकने वाले उत्पादों से बचें, पैक्ड सामान पर निर्माण और समाप्ति तिथि अवश्य जांचें तथा अत्यधिक सस्ते दाम पर मिल रहे खाद्य पदार्थों से सावधान रहें।
यदि किसी को मिलावट की आशंका हो तो खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। प्रशासन का दावा है कि मिलावट के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा, ताकि नागरिकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा सके।
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