कौन हैं Mojtaba Khamenei? जो बने हैं ईरान के नए सुप्रीम लीडर
अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे Mojtaba Khameneiको देश का नया सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) चुन लिया गया है।
ईरान में सत्ता परिवर्तन के बीच बड़ा फैसला सामने आया है। अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे Mojtaba Khameneiको देश का नया सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) चुन लिया गया है। यह फैसला ईरान की 88 सदस्यीय धार्मिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने लिया है।
सरकारी मीडिया के अनुसार, असेंबली ने कठिन परिस्थितियों और युद्ध जैसे हालात के बावजूद नेतृत्व चयन की प्रक्रिया पूरी की। संस्था के बयान को ईरान के सरकारी टीवी पर पढ़कर सुनाया गया, जिसमें कहा गया कि दुश्मनों की धमकियों और सचिवालय के कार्यालयों पर हुए हमलों के बावजूद देश के नए सर्वोच्च नेता का चयन बिना किसी रुकावट के किया गया।
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Toggleयुद्ध संकट के बीच हुआ नेतृत्व का फैसला
ईरान इस समय गंभीर भू-राजनीतिक तनाव से गुजर रहा है। अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों में अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद देश में नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई थी।
इस दौरान कई अफवाहें भी सामने आईं कि उनके बेटे Mojtaba Khamenei भी हमलों में मारे गए हैं। कई दिनों तक उनके बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली थी।
हालांकि 3 मार्च को ईरान के सरकारी मीडिया ने बताया कि मोजतबा खामेनेई जीवित हैं और देश के महत्वपूर्ण मामलों पर वरिष्ठ नेताओं के साथ सलाह-मशविरा कर रहे हैं। इसके बाद उनके सुप्रीम लीडर बनने की अटकलें तेज हो गई थीं।
कौन हैं Mojtaba Khamenei?
Mojtaba Khamenei का जन्म 8 सितंबर 1969 को ईरान के उत्तर-पूर्वी शहर मशहद में हुआ था। वह अयातुल्लाह अली खामेनेई के छह बच्चों में दूसरे नंबर पर हैं।
उन्होंने तेहरान के प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थान अलावी स्कूल से अपनी शुरुआती शिक्षा प्राप्त की। बाद में उन्होंने धार्मिक अध्ययन की दिशा में कदम बढ़ाया और कुम शहर में स्थित प्रमुख शिया धार्मिक केंद्रों में अध्ययन किया।
दिलचस्प बात यह है कि मोजतबा ने अपने पिता की तरह सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका नहीं निभाई। उन्होंने न तो कोई आधिकारिक सरकारी पद संभाला और न ही सार्वजनिक भाषणों या मीडिया इंटरव्यू में हिस्सा लिया। यही वजह है कि उन्हें लंबे समय तक “परदे के पीछे की ताकत” माना जाता रहा है।
पर्दे के पीछे प्रभावशाली भूमिका
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, 2000 के दशक में जारी अमेरिकी राजनयिक दस्तावेजों में Mojtaba Khamenei को ईरान की सत्ता व्यवस्था के भीतर एक प्रभावशाली और निर्णायक व्यक्ति बताया गया था।
कई विश्लेषकों का मानना है कि वह लंबे समय से देश की राजनीतिक और सुरक्षा व्यवस्था में अहम भूमिका निभाते रहे हैं, खासकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कुछ वर्गों के साथ उनके करीबी संबंध बताए जाते हैं।
धार्मिक कद और ‘आयतुल्लाह’ की पदवी
हाल के वर्षों में ईरान के कुछ सरकारी और धार्मिक संस्थानों से जुड़े मीडिया ने मोजतबा को “आयतुल्लाह” कहकर संबोधित करना शुरू किया है। पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह उनके धार्मिक कद को मजबूत दिखाने की कोशिश हो सकती है।
ईरान की धार्मिक व्यवस्था में आयतुल्लाह का दर्जा किसी विद्वान धर्मगुरु को दिया जाता है, जो इस्लामी कानून और धर्मशास्त्र में उच्च स्तर की विशेषज्ञता रखता हो।
इतिहास में ऐसा पहले भी हो चुका है। 1989 में जब अली खामेनेई को सुप्रीम लीडर बनाया गया था, तब उन्हें भी अपेक्षाकृत कम समय में आयतुल्लाह की उपाधि दी गई थी।
राजनीतिक विवादों से भी जुड़ा नाम
Mojtaba Khamenei का नाम पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 2005 के ईरानी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान चर्चा में आया था। उस चुनाव में महमूद अहमदीनेजाद की जीत हुई थी।
सुधारवादी नेता मेहदी कर्रूबी ने उस समय आरोप लगाया था कि मोजतबा ने चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया और कुछ सुरक्षा समूहों तथा मिलिशिया संगठनों के जरिए प्रभाव डालने की कोशिश की।
हालांकि इन आरोपों की कभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन 2009 के विवादित चुनावों और उसके बाद शुरू हुए “ग्रीन मूवमेंट” विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी उनका नाम चर्चा में रहा।
सबसे बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई के सामने सबसे बड़ी चुनौती ईरान की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति को स्थिर करना होगी।
देश पहले से ही पश्चिमी प्रतिबंधों, आर्थिक संकट और क्षेत्रीय तनाव से जूझ रहा है। ऐसे में नए सुप्रीम लीडर को जनता का विश्वास जीतना और शासन व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना बड़ी जिम्मेदारी होगी।
इसके अलावा कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पिता के बाद बेटे के सुप्रीम लीडर बनने से यह धारणा मजबूत हो सकती है कि इस्लामी गणराज्य धीरे-धीरे वंशानुगत व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है।
अमेरिका और इजरायल के निशाने पर नया नेतृत्व
क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए यह भी माना जा रहा है कि मोजतबा खामेनेई भविष्य में अमेरिका और इजरायल के निशाने पर रह सकते हैं। इजरायल के रक्षा मंत्री पहले ही कह चुके हैं कि ईरान के किसी भी नए नेतृत्व को संभावित खतरे के रूप में देखा जाएगा।
ऐसे में मोजतबा खामेनेई का नेतृत्व न सिर्फ ईरान की घरेलू राजनीति बल्कि मध्य पूर्व की भू-राजनीति के लिए भी बेहद अहम साबित हो सकता है।






