London Halal Controversy: लंदन में भारतीय रेस्टोरेंट पर बवाल, “हम Halal नहीं बेचते” बोर्ड के बाद मालिक को मिली धमकियां
London Halal Controversy: ब्रिटेन की राजधानी लंदन में एक भारतीय रेस्टोरेंट को लेकर इन दिनों बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। लंदन में स्थित भारतीय रेस्टोरेंट ‘रंगरेज’ (Rangrez) के मालिक हरमन सिंह कपूर ने हलाल मांस परोसने से इनकार किया, जिसके बाद यह मामला सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक चर्चा का विषय बन गया। हालात इतने बिगड़ गए कि कपूर ने अपना 16 साल पुराना रेस्टोरेंट बंद करने तक की घोषणा कर दी।
यह विवाद केवल खाने के तरीके तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें धार्मिक मान्यताएं, अभिव्यक्ति की आज़ादी, नस्लवाद के आरोप और पुलिस की भूमिका जैसे कई मुद्दे भी जुड़ गए हैं।
‘हम हलाल नहीं बेचते’ बोर्ड से शुरू हुआ विवाद
Harman Singh Kapoor ने बताया कि उन्होंने अपने रेस्टोरेंट के बाहर एक बोर्ड लगाया था, जिस पर लिखा था—
“Proudly We Don’t Sell Halal”, यानी “हमें गर्व है कि हम हलाल खाना नहीं बेचते।”
कपूर का कहना है कि वह सिख धर्म से जुड़े हैं और सिख धार्मिक परंपराओं के अनुसार ‘कुठा’ मांस, यानी हलाल तरीके से काटा गया मांस, खाना या बेचना वर्जित माना जाता है। इसी वजह से उन्होंने अपने रेस्टोरेंट में हलाल मांस परोसने से साफ इनकार कर दिया।
हालांकि यह फैसला कुछ लोगों को पसंद नहीं आया। धीरे-धीरे इस बोर्ड की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं और इसके बाद विरोध शुरू हो गया।
रेस्टोरेंट के बाहर प्रदर्शन और बहस
हाल ही में सोशल मीडिया पर कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें Harman Singh Kapoor को अपने रेस्टोरेंट के बाहर लोगों से तीखी बहस करते देखा जा सकता है। वीडियो में कुछ लोग रेस्टोरेंट के बाहर खड़े होकर सवाल पूछते नजर आते हैं, जबकि कपूर उनसे बहस करते दिखाई देते हैं।
एक वीडियो में तो हालात इतने गर्म हो गए कि बीच-बचाव करने आए एक व्यक्ति से भी कपूर की तीखी नोकझोंक हो गई। कपूर का कहना है कि हलाल भोजन न बेचने के कारण उन्हें लगातार धमकियां और गालियां मिल रही हैं।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अगर ब्रिटेन में कई रेस्टोरेंट खुलेआम हलाल का बोर्ड लगा सकते हैं, तो उन्हें यह कहने का अधिकार क्यों नहीं है कि वे हलाल खाना नहीं बेचते।
पुलिस के साथ भी हुआ टकराव
मामला तब और बढ़ गया जब कपूर ने एक और वीडियो पोस्ट किया, जिसमें रेस्टोरेंट के बाहर पुलिस अधिकारी दिखाई दे रहे थे। कपूर ने आरोप लगाया कि लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस प्रदर्शनकारियों का पक्ष ले रही है और उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे रही।
वीडियो में कपूर को पुलिस अधिकारियों पर नाराज होते हुए भी देखा गया। उन्होंने दावा किया कि पुलिस उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रही, जबकि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं।
हालांकि पुलिस का कहना है कि उन्होंने मामले की जांच की है और सुरक्षा के लिए जरूरी कदम भी उठाए गए हैं।
16 साल पुरा रेस्टोरेंट बंद करने का फैसला
Rangrez Restaurant London से जुड़े विवाद के बीच हरमन सिंह कपूर ने बड़ा फैसला लेते हुए घोषणा की कि वह अपना 16 साल पुराना रेस्टोरेंट बंद कर देंगे। लगातार बढ़ते विवाद और दबाव के कारण यह निर्णय लिया गया है।
Harman Singh Kapoor के अनुसार इसके पीछे कई कारण रहे हैं। उनका कहना है कि बढ़ती लागत, ऑनलाइन ट्रोलिंग, फर्जी रिव्यू और प्रदर्शनकारियों की धमकियों ने उनके लिए काम करना बेहद मुश्किल बना दिया था।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ लोगों ने उनके रेस्टोरेंट को बदनाम करने के लिए इंटरनेट पर सैकड़ों ‘जीरो स्टार’ फेक रिव्यू पोस्ट किए।
सोशल मीडिया पर बंटा जनमत
इस पूरे विवाद ने सोशल मीडिया पर भी लोगों को दो हिस्सों में बांट दिया है। कुछ लोग हरमन सिंह कपूर का समर्थन कर रहे हैं और कह रहे हैं कि किसी भी व्यवसायी को यह अधिकार है कि वह अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भोजन परोसे या न परोसे।
वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग कपूर के बयान और बोर्ड को विवादास्पद बताते हुए उन्हें नस्लवादी तक कह रहे हैं।
सिख समुदाय में भी मतभेद
इस मामले पर सिख समुदाय की राय भी एक जैसी नहीं है। कई सिख संगठनों का कहना है कि धार्मिक नियमों के अनुसार हलाल मांस से बचना सही है और कपूर को यह अधिकार है कि वह अपने रेस्टोरेंट में हलाल न बेचें।
लेकिन कुछ संगठनों ने यह भी कहा कि विवाद को शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से सुलझाया जाना चाहिए। उनके मुताबिक सोशल मीडिया पर तीखी भाषा का इस्तेमाल करने से पूरे समुदाय की छवि प्रभावित होती है।
आगे क्या करेंगे कपूर?
रेस्टोरेंट बंद करने की घोषणा के साथ ही हरमन सिंह कपूर ने कहा है कि अब वह सामाजिक मुद्दों पर खुलकर आवाज उठाएंगे। उनका कहना है कि वह ब्रिटेन में धार्मिक कट्टरपंथ और समुदायों के खिलाफ हो रहे अपराधों के खिलाफ सक्रिय रूप से अभियान चलाएंगे।
फिलहाल यह मामला केवल एक रेस्टोरेंट के फैसले तक सीमित नहीं रह गया है। यह बहस अब इस सवाल पर आकर खड़ी हो गई है कि क्या किसी व्यवसायी को अपनी धार्मिक मान्यताओं के आधार पर ऐसा फैसला लेने की पूरी आजादी है, या इससे समाज में नया विवाद पैदा होता है।
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