
Maa Kushmanda: नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा आराधना करने की मान्यता है। मां कुष्मांडा मां दुर्गा का रूप है। जो भी व्यक्ति मां दुर्गा के कुछ मंडल रूप की पूजा आराधना करता है, उसकी बुद्धि की प्राप्ति होती है, और कार्य में आ रही सारी बढ़ाएं दूर हो जाते हैं। इस दिन माता को मिठाई फल और मालपुआ अर्पित करने से मन खुश होती है। हमारे पौराणिक कथाओं में यह लिखित है कि विद्यार्थियों को मां कुष्मांडा की पूजा आराधना जरूर करनी चाहिए, जब विद्यार्थियों पर मां कुष्मांडा मां का आशीर्वाद होता है तो वह हमेशा सफल होते हैं।
Maa Kushmanda: मां कुष्मांडा का स्वरूप
पौराणिक कथाओं में जैसा बताया गया है उसके आधार पर मां कुष्मांडा का स्वरूप काफी तेजस्वी और दिव्या है। कहा जाता है की मां कुष्मांडा के आठ हाथ है, अपने ऑटो हाथों में मां कुष्मांडा ने कमंडल, धनुष बाण, कमल का फूल और अमृत कलश धारण किया है। साथ ही उन्होंने चक्र, गधा और जब माल भी धारण की है। मां कुष्मांडा की सवारी शेर है। मां कुष्मांडा का स्वरूप काफी शांत और ममता में है।
Maa Kushmanda: क्यों करनी चाहिए मां कुष्मांडा की पूजा?
मां कुष्मांडा को परमेश्वरी के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि जो भी मां कुष्मांडा की पूजा करता है उसके सारे रुके हुए काम पूरे होने लगते हैं। जिनके कामों में बढ़ाएं आ रही है, मां की पूजा आराधना करने से सारी बढ़ाएं दूर हो जाते हैं। जो भी व्यक्ति मां कुष्मांडा की पूजा करता है उनको सुख और सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। हमारे पुराणों में यह कहा गया है कि जो भी विद्यार्थी नवरात्रों के समय मां कुष्मांडा की पूजा आराधना करता है उसे मां दुर्गा बुद्धि देती है और हमेशा उसे व्यक्ति का विकास होता है।
Maa Kushmanda: मां दुर्गा को कुष्मांडा क्यों बोला जाता है?
देवी कुष्मांडा मां दुर्गा का चौथा स्वरूप है। भागवत पुराण में भी मां कुष्मांडा की महिमा का वर्णन किया गया है, कहां गया है कि उन्होंने अपनी सिर्फ एक हल्की सी मुस्कान से ही ब्रह्मांड बना दिया था, बस यही कारण है कि उन्हें मां कुष्मांडा देवी कहा जाता है। ऐसा कहा गया है कि सृष्टि के आरंभ से ही सृष्टि में सिर्फ अंधेरा था और अंधेरे के अलावा कुछ नहीं था। जैसे ही मां ने मंद मंद मुस्कान्य वैसे ही सर अंधेरापन दूर हो गया। पृथ्वी में सूर्य की गर्मी सहने की शक्ति नहीं है , इसीलिए मैं कुष्मांडा की पूजा करने से भक्तों को शक्ति और ऊर्जा दोनों प्राप्त होती है ।
Maa Kushmanda: मां कुष्मांडा का भोग
मां दुर्गा ममता में है। मां दुर्गा को भक्ति भाव से जो भी दे दिया जाए मां उसे स्वीकार करती हैं। लेकिन भक्ति मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए ना ना प्रकार प्रयत्न करते हैं। जैसे की मां कुष्मांडा को पीला रंग बहुत पसंद है, इसीलिए मां कुष्मांडा की पूजा में पीले रंग केसर वाला पेठा चढ़ाना चाहिए। इसके अलावा माता को केसर और सफेद पेठे के फल भी अर्पित करना चाहिए। मां कुष्मांडा को आंवला,मालपुआ और बताशे काफी प्रिया है।
Maa Kushmanda: मां कुष्मांडा की पूजा विधि
- नवरात्र के चौथे दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि करके स्वच्छ कपड़े धारण करें।
- पूजा स्थल की गंगाजल से सफाई करें। फिर लकड़ी की चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाए और उसमें मां कुष्मांडा की प्रतिमा स्थापित करें।
- पूजा में पीले रंग के वस्त्र, पीले रंग के फूल और मिठाई का उपयोग करें।
- मां कुष्मांडा को कपूर, पान के पत्ते, ध्रुव, चंदन रोली और सिंदूर अर्पित करें।
- मां के मित्रों का 108 बार उच्चारण करें। मां दुर्गा चालीसा का पाठ करें और आरती करें।
- अंत में मन से क्षमा याचना जरूर करें।
Maa Kushmanda: मां कुष्मांडा का पूजा मंत्र
- मां कुष्मांडा का पूजा मंत्र : ऊं कुष्माण्डायै नम:
- बीज मंत्र: कुष्मांडा: ऐं ह्री देव्यै नम:
- ध्यान मंत्र: या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
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