Nitin Gadkari Defamation Case: बेटे की कंपनी पर Fake Data फ़ैलाने वालों को मानहानि केस की चेतावनी
Nitin Gadkari Defamation Case: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अपने बेटे की कंपनी और इथेनॉल नीति को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर खुलकर जवाब दिया है। उन्होंने इन आरोपों को झूठ प्रचार और पेड न्यूज़ बताया और कहा की गलत आंकड़े देकर बदनाम करने वालों के खिलाफ वे मानहानि का मुकदमा दर्ज कराएंगे।
बेटे की कंपनी पर क्या है आरोप
पिछले कुछ महीनों से कांग्रेस पार्टी लगातार आरोप लगा रही है की नितिन गडकरी के बेटों निखिल गडकरी और सारंग गडकरी को इथेनॉल नीति से सीधा फायदा पहुंचा है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने दावा किया था की निखिल गडकरी की कंपनी सियां एग्रो इंडस्ट्रीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर का रेवेन्यू जून 2024 में 18 करोड़ रुपये था, जो जून 2025 तक बढ़कर 523 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी के शेयर की कीमत भी जनवरी 2025 के 37.45 रुपये से बढ़कर 638 रुपये तक पहुंच गई, यानी 2100 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त। सारंग गडकरी मानस एग्रो इंडस्ट्रीज से जुड़े हैं, जो इथेनॉल कारोबार में है। कांग्रेस ने इस मामले में लोकापन जांच की मांग भी की थी।
गडकरी ने आंकड़ों से दिया जवाब
नवभारत कॉन्क्लेव 2026 में नितिन गडकरी ने इन सभी आरोपों को सिरे से ख़ारिज किया। उन्होंने कहा की देश की करीब 550 कंपनियों में उनके बेटे की कंपनी का योगदान मात्रा 0.07 प्रतिशत है। गडकरी ने इस पुरे विवाद को झूठा प्रचार और पेड न्यूज़ करार दिया। उन्होंने साफ़ किया की उनका मकसद देश को आत्मनिर्भर बनाना, प्रदुषण कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है, न की किसी को व्यक्तिगत फायदा पहुंचना।
किसानों को इथेनॉल से मिला फायदा
गडकरी ने बताया की मक्के और बांस से बनने वाले इथेनॉल के जरिए उत्तर प्रदेश और बिहार के गरीब किसानों की जेब में अब तक 45,000 करोड़ रुपये पहुंच चुके हैं। उन्होंने आलोचकों को चुनौती देते हुए कहा की अगर देशहित, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की भलाई के लिए काम करना गुनाह है, तो वे यह गुनाह बार-बार करेंगे। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर वाहन या इथेनॉल से जुडी कोई तकनीकी शिकायत है, तो उसकी आधिकारिक शिकायत दर्ज कराइ जाए, न कि सोशल मीडिया पर बेबुनियाद आरोप लगाए जाएं।
गलत आंकड़ों पर मानहानि कि चेतावनी
गडकरी ने कड़े शब्दों म कहा कि अगर कोई उनके बेटे कि कंपनी को लेकर गलत और भ्रामक आंकड़े सार्वजनिक रूप से पेश करता है, तो इसे वे गंभीरता से लेंगे और ऐसे लोगों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज करने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करना और उनके परिवार को बदनाम करने कि कोशिश करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पहले भी उठ चुके हैं ऐसे सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब नितिन गडकरी को अपने बेटों कि कंपनियों को लेकर सवालों का सामना करना पड़ा हो। सितंबर 2025 में नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान भी उन्होंने इसी तरह के आरोपों को ख़ारिज किया था। उस समय उन्होंने कहा था कि यह सब एक शक्तिशाली आयात लॉबी कि साजिश है, जिसे इथेनॉल ब्लेंडिंग कि वजह से नुक्सान हुआ है। गडकरी ने बताया था कि जीवाश्म ईंधन के आयात पर हर साल करीब 22 लाख करोड़ रुपये खर्च होते थे, जो उनकी नीति से कम हुआ है। उन्होंने खुद कि तुलना उस पेड़ से कि थी, जिस पर फल लगते हैं और लोग उसी पर पत्थर फेंकते हैं।
आगे क्या हो सकता है?
नितिन गडकरी के इस बयान के बाद यह विवाद और गहरा सकता है। एक ओर कांग्रेस पार्टी लोकापन जांच कि मांग पर अड़ी है, वहीं दूसरी ओर गडकरी ने साफ़ कर दिया है कि वे गात जानकारी फ़ैलाने वजन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस मामले में कोई औपचारिक मानहानि का मुकदमा दर्ज होता है या नहीं, और कांग्रेस कि मांग पर साकार का क्या रुख रहता है।
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