Akhilesh Yadav Attack: पौधारोपण अभियान को बताया 'भ्रष्टारोपण', इथेनॉल नीति पर भी उठाए सवाल
Akhilesh Yadav Attack: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को योगी आदित्यनाथ सरकार पर दो अलग अलग मुद्दों को लेकर तीखा हमला बोलै। सपा मुख्यालय से जारी बयां में उन्होंने प्रदेश सरकार के पौधरोपण अभियान पर सवाल उठाए। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए उन्होंने केंद्र सरकार की इथेनॉल मिश्रित ईंधन नीति की भी कड़ी निंदा की।
पौधारोपण अभियान पर उठाए सवाल
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को ‘पौधारोपण महाभियान-2026’ को लेकर जनप्रतिनिधियों से वर्चुअल संवाद किया था। इस दौरान मंत्रियों, सांसदों, विधायकों से लेकर नगर पंचायत पाषदों तक शामिल हुए। सीएम योगी ने अपील की कि 12 जुलाई को ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत एक ही दिन में 35 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। इसी घोषणा पर अखिलेश यादव ने सवाल उठाते हुए कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के बजाय सार्वजनिक धन के दुरूपयोग का जरिया बन सकता है। उनका कहना था कि पौधरोपण के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं, लेकिन जमीन पर कोई ठोस असर नहीं दीखता।
भ्रष्टारोपण बताते हुए लगाए गंभीर आरोप
अखिलेश यादव ने इस अभियान को भ्रष्टारोपण करार देते हुए इसे 350 करोड़ रुपये कि गुप्त योजना बताया। उनका आरोप था कि हर पेड़ के नाम पर काम से काम 10 रुपये कमाने का यह तरीका है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 10 वर्षों में सरकार ने सिर्फ कागजों पर पेड़ लगाए हैं, जमीं पर कोई पेड़ नजर नहीं आता, और जो थोड़े बहुत पेड़ लगे भी वे उचित देखभाल न मिलने के कारन सुख गए।
सपा प्रमुख ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में पेड़ों और जंगलों कि अवैध कटाई हो रही है, जिससे हरित क्षेत्र लगातार घाट रहा है। उन्होंने इसे पर्यावरण के लिए एक गंभीर चुनौती बताया।
नदियों कि सफाई का मुद्दा भी उठाया
नदियों कि सफाई के मुद्दे पर बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने नदियों को साफ़ करने का वादा किया था, लेकिनउसका बजट भी सही तरीके से खर्च नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि न गंगा साफ़ हुई और न उसकी सहायक नदियां, और यमुना नदी भी बुरी तरह प्रदूषित बानी हुई है। उन्होंने याद दिलाया कि सपा सरकार के दौरान लखनऊ में गौतमी नदी कि सफाई कर विश्वस्तरीय गौतमी रिवरफ्रंट बनाया गया था, लेकिन मौजूदा सरकार ने उसे भी बर्बाद कर दिया।
इथेनॉल मिश्रित ईंधन नीति पर भी सवाल
इसी दिन एक अलग बयान में अखिलेश यादव ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल नीति को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि इथेनॉल मुनाफाखोरी का नया नाम है और यह सरकार, इथेनॉल बनाने वालों तथा तेल कंपनियों के बीच एक तरह कि साझेदारी है। उनके अनुसार सरकार यह तो बताती है कि इससे प्रदुषण घटेगा और कच्चे तेल कि आयत पर निर्भरता काम रहेगी, लेकिन वाहनों कि घटती माइलेज पर कोई जवाब नहीं देती।
वाहन मालिकों को हो रही परेशानी का दावा
सपा अध्यक्ष ने दावा किया कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों में स्टार्ट होने कि समस्या बढ़ रही है और गाड़ियां बिच रास्ते में बंद हो रही है। उन्होंने कहा कि पुराने वाहन इस तरह के ईंधन के अनुरूप तैयार नहीं किए गए थे, जिससे इंजन और फ्यूल सिस्टम में जंग तथा तकनीकी खराबी कि आशंका बढ़ रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वाहन ख़राब होने पर बीमा कम्पनियाँ इथेनॉल को आधार बनाकर दावे ख़ारिज करने के बहाने तलाश रही है, जिससे वाहनों कि पुनर्विक्रिया कीमत और उनकी कुल उपयोग अवधि पर भी असर पद रहा है।
सरकार से माँगा जवाब
अखिलेश यादव ने सरकार से मांग की कि इथेनॉल नीति से जुड़े सभी पहलुओं पर पारदर्शी जानकारी सार्वजानिक कि जाए। उनका कहना था कि यदि यह नीति वास्तव में जनहित के लिए है, तो वाहन चालकों , किसाओं और उपभोक्ताओं कि आशंकाओं का तथ्यात्मक जवाब दिया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि कहीं यह पूरी व्यवस्था चंद उद्योगों और कंपनियों को फायदा पहुंचाने का मध्यमा तो नहीं बन रही है।
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