Holi 2026 Lunar Eclipse का महा-संयोग! 500+ साल बाद दिखेगा लाल चांद, जानें Time & Impact
Holi 2026 Lunar Eclipse: 3 मार्च 2026… रंगों का त्योहार होली… और उसी दिन आसमान में दिखेगा एक बेहद दुर्लभ नज़ारा — पूर्ण चंद्र ग्रहण, जिसे आम भाषा में ‘ब्लड मून’ कहा जाता है। यह संयोग न सिर्फ खगोलीय दृष्टि से खास है, बल्कि धार्मिक मान्यताओं के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारों का कहना है कि होली के दिन ऐसा पूर्ण चंद्र ग्रहण करीब 500 से 580 साल बाद देखने को मिलेगा।
क्या है खास इस बार?
3 मार्च 2026, मंगलवार को पड़ रही होली के दिन दोपहर 3:20 बजे से चंद्र ग्रहण की शुरुआत होगी और यह शाम 6:47 बजे तक चलेगा। भारत में यह ग्रहण दिखाई देगा, हालांकि अलग-अलग राज्यों में इसका स्वरूप थोड़ा अलग हो सकता है। उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे असम और अरुणाचल प्रदेश में यह पूर्ण रूप में नजर आएगा, जबकि दिल्ली, मुंबई और उत्तर भारत के अन्य शहरों में आंशिक रूप से दिखाई देगा।
ग्रहण के दौरान चंद्रमा का रंग तांबे जैसा या गहरे लाल रंग का दिखाई देगा। यही वजह है कि इसे ‘ब्लड मून’ कहा जाता है।
ब्लड मून आखिर होता क्यों है?
जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तो पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। उस समय सूर्य की सीधी रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती। लेकिन पृथ्वी के वायुमंडल से छनकर आने वाली लाल रोशनी चंद्रमा तक पहुंचती है। इसी कारण चंद्रमा लाल या तांबे जैसा दिखाई देता है। यह पूरी तरह प्राकृतिक खगोलीय प्रक्रिया है, लेकिन इसका दृश्य बेहद रोमांचक होता है।
सूतक काल भी रहेगा मान्य
चूंकि यह ग्रहण भारत में दृश्यमान होगा, इसलिए इसका सूतक काल भी मान्य रहेगा। सूतक ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले शुरू हो जाता है। यानी सुबह लगभग 6:20 बजे से सूतक काल लागू माना जाएगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूतक काल में शुभ कार्य, पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श और भोजन बनाने से परहेज किया जाता है। खासकर गर्भवती महिलाओं को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है, लेकिन आस्था के कारण लोग नियमों का पालन करते हैं।
शहरों में कब दिखेगा लाल चांद?
कुछ प्रमुख शहरों में ब्लड मून दिखने का अनुमानित समय इस प्रकार है:
- प्रयागराज: शाम 6:08 से 6:46 बजे तक
- वाराणसी: शाम 6:04 से 6:46 बजे तक
- कानपुर: शाम 6:14 से 6:46 बजे तक
चंद्रमा जब उदय होगा, उसी समय उसका रंग हल्का लाल या तांबे जैसा दिखाई दे सकता है। सूर्यास्त के साथ-साथ यह दृश्य और भी ज्यादा आकर्षक लगेगा।
580 साल वाली चर्चा क्या है?
लोगों के बीच 540 से 580 साल बाद बनने वाले दुर्लभ संयोग की चर्चा हो रही है। दरअसल, नवंबर 2021 में 580 सालों में सबसे लंबा आंशिक चंद्र ग्रहण हुआ था। वहीं 3 मार्च 2026 का ग्रहण इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि यह होली जैसे बड़े त्योहार के दिन पड़ रहा है। ऐसे संयोग बहुत कम बनते हैं।
क्या डरने की जरूरत है?
विशेषज्ञों का कहना है कि चंद्र ग्रहण पूरी तरह सुरक्षित और प्राकृतिक घटना है। इसे नंगी आंखों से भी देखा जा सकता है, क्योंकि इसमें सूर्य ग्रहण जैसी हानिकारक किरणों का खतरा नहीं होता। हां, अगर आप दूरबीन या कैमरे से देखना चाहें तो अनुभव और भी बेहतर हो सकता है।
रंगों के बीच लाल चांद का रोमांच
इस बार होली सिर्फ रंगों तक सीमित नहीं रहेगी। शाम ढलते-ढलते आसमान में लाल चांद का अद्भुत नजारा देखने को मिलेगा। सोचिए, एक तरफ गुलाल और रंगों की मस्ती, दूसरी तरफ आसमान में खून जैसा लाल चमकता चंद्रमा — यह दृश्य अपने आप में यादगार होगा।
चाहे आप इसे आस्था की नजर से देखें या विज्ञान के नजरिए से, 3 मार्च 2026 की यह शाम खास होने वाली है। अगर मौसम साफ रहा, तो यह ब्लड मून आने वाले कई वर्षों तक चर्चा में रहेगा।
यह भी पढ़े
2 या 3 मार्च? चंद्रग्रहण और भद्रा के साए में उलझी तारीख, जानिए कब है Holika Dahan Muhurat







