Anemia in India: रेड लीफी ग्रीन्स से पूरी हो सकती है आयरन की कमी
देश में 15 से 49 वर्ष की करीब 57 से 59 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं।
Anemia in India: भारत में महिलाओं के बीच एनीमिया यानी खून की कमी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (NFHS-5) के अनुसार देश में 15 से 49 वर्ष की करीब 57 से 59 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इसका सबसे बड़ा कारण शरीर में आयरन की कमी है।
आयरन शरीर के लिए बेहद जरूरी मिनरल है, जो खून में हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है। जब शरीर में आयरन कम हो जाता है, तो ऑक्सीजन का संचार सही तरीके से नहीं हो पाता। इसका असर थकान, कमजोरी और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के रूप में सामने आता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सही खानपान अपनाकर आयरन की कमी को काफी हद तक रोका जा सकता है। लाल पत्तेदार सब्जियां यानी रेड लीफी ग्रीन्स आयरन का एक अच्छा स्रोत मानी जाती हैं और इन्हें नियमित आहार में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।
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Toggleशरीर में आयरन क्यों जरूरी है?
दिल्ली स्थित एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार अग्रवाल के मुताबिक आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने के लिए जरूरी होता है। शरीर का लगभग 70 प्रतिशत आयरन ब्लड में हीमोग्लोबिन के रूप में मौजूद रहता है।
हीमोग्लोबिन रेड ब्लड सेल्स में पाया जाने वाला एक प्रोटीन है, जो फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर शरीर के अलग-अलग अंगों तक पहुंचाता है। अगर शरीर में आयरन की कमी हो जाए तो ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो जाती है, जिससे थकान, कमजोरी और एनीमिया जैसी समस्या हो सकती है।
प्लांट-बेस्ड और एनिमल-बेस्ड आयरन में अंतर
आयरन दो प्रकार का होता है—हीम आयरन और नॉन-हीम आयरन।
- नॉन-हीम आयरन पौधों से मिलने वाला आयरन होता है, जो हरी सब्जियों, दालों और अनाज में पाया जाता है। शरीर इसे धीरे-धीरे अवशोषित करता है।
- हीम आयरन मांस, मछली और अंडे जैसे एनिमल फूड्स में मिलता है और यह शरीर में आसानी से अवशोषित हो जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार अगर आप शाकाहारी हैं तो आयरन के बेहतर अवशोषण के लिए विटामिन C से भरपूर फूड्स जैसे नींबू, संतरा और आंवला को डाइट में शामिल करना चाहिए।
महिलाओं में आयरन की कमी ज्यादा क्यों?
महिलाओं में आयरन की कमी पुरुषों की तुलना में अधिक देखने को मिलती है। इसके पीछे कई कारण होते हैं, जैसे:
- पीरियड्स के दौरान अधिक ब्लीडिंग
- गर्भावस्था के दौरान शरीर को ज्यादा आयरन की जरूरत
- ब्रेस्टफीडिंग के दौरान बढ़ी हुई पोषण जरूरत
- असंतुलित खानपान
- बार-बार डाइटिंग या उपवास
इसके अलावा जो महिलाएं शाकाहारी डाइट लेती हैं या जिन्हें आंतों से जुड़ी बीमारी होती है, उनमें भी आयरन की कमी का खतरा ज्यादा रहता है।
आयरन की कमी के संकेत
आयरन की कमी धीरे-धीरे शरीर को प्रभावित करती है। शुरुआत में इसके लक्षण हल्के होते हैं, लेकिन समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह एनीमिया में बदल सकती है।
इसके सामान्य लक्षणों में शामिल हैं:
- लगातार थकान और कमजोरी
- चक्कर आना
- सांस फूलना
- त्वचा का पीला पड़ना
- दिल की धड़कन तेज होना
- बाल झड़ना और नाखून कमजोर होना
अगर ये लक्षण लंबे समय तक बने रहें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
रेड लीफी ग्रीन्स क्या होती हैं?
रेड लीफी ग्रीन्स यानी लाल या बैंगनी रंग की पत्तेदार सब्जियां, जिनमें प्राकृतिक पिगमेंट एंथोसायनिन पाया जाता है। यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होता है और शरीर के लिए फायदेमंद माना जाता है।
इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- लाल पालक
- चौलाई (अमरनाथ) के पत्ते
- चुकंदर के पत्ते
ये सब्जियां आयरन के साथ-साथ फोलेट, फाइबर, विटामिन A और विटामिन C से भी भरपूर होती हैं।
रेड लीफी ग्रीन्स से कितना आयरन मिलता है?
करीब 300 ग्राम रेड लीफी ग्रीन्स में लगभग 3.7 मिलीग्राम आयरन पाया जाता है। इससे शरीर की दैनिक आयरन जरूरत का लगभग 20 से 45 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार आयरन की रोजाना जरूरत उम्र और लिंग के अनुसार अलग-अलग होती है। उदाहरण के लिए:
- पुरुष: 8 से 10 मिलीग्राम प्रतिदिन
- महिलाएं (19-50 वर्ष): 15 से 18 मिलीग्राम
- गर्भवती महिलाएं: 25 से 27 मिलीग्राम
डाइट में कैसे शामिल करें?
रेड लीफी ग्रीन्स को रोजमर्रा के खाने में कई तरीकों से शामिल किया जा सकता है। जैसे:
- साग या सब्जी बनाकर
- दाल में मिलाकर
- पराठा या थेपला में डालकर
- सलाद या सूप के रूप में
- स्मूदी में फलों के साथ
हालांकि जिन लोगों को किडनी स्टोन या ऑक्सलेट की समस्या होती है, उन्हें इसे नियमित रूप से खाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
आयरन के अन्य अच्छे स्रोत
रेड लीफी ग्रीन्स के अलावा कई अन्य फूड्स भी आयरन से भरपूर होते हैं।
शाकाहारी स्रोत:
पालक, मेथी, दालें, राजमा, छोले, सोयाबीन, तिल, कद्दू के बीज और सूखे मेवे।
नॉन-वेज स्रोत:
रेड मीट, चिकन, मछली और अंडे।
कब जरूरी है डॉक्टर से सलाह लेना?
अगर शरीर में लगातार थकान, चक्कर, सांस फूलना या दिल की धड़कन तेज होने जैसी समस्या हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
आयरन की कमी का पता आमतौर पर हीमोग्लोबिन टेस्ट, सीरम फेरिटिन टेस्ट और CBC टेस्ट के जरिए लगाया जाता है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर आयरन सप्लीमेंट भी दे सकते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित आहार और आयरन से भरपूर फूड्स को रोजाना डाइट में शामिल करके एनीमिया जैसी समस्या से काफी हद तक बचा जा सकता है।





